Category: Culture

उत्तराखंड: संकट में वह सौ साल पुराना पेड़ जिसके जरिए हुआ था आदमखोर तेंदुए का अंत गुलाबराय में आम के…

हार्डवेयर, नेटवर्किंग, मोबाइल और उपकरणों की मरम्मत की ट्रेनिंग लेकर दिव्यांग बन रहे आत्मनिर्भर

नई दिल्ली: दिव्यांगों की भारतीय क्रिकेट टीम ने सिंगापुर दौरे के दौरान जब सिंगापुर क्रिकेट टीम पर जीत हासिल की थी,…

दुनियाभर में मनाया जा रहा 5वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, पीएम मोदी ने कहा- धर्म और जाति से ऊपर है योग

 दिल्ली: आज भारत समेत दुनियाभर में पांचवां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) मनाया जा रहा है. देश में मुख्य आयोजन झारखंड (Jharkhand)…

उत्तराखंड में क्यों खाली हो गए हजारों गांव, पलायन आयोग ने मुख्यमंत्री ने सौंपी रिपोर्ट

जब से उत्तराखंड राज्य अस्तित्व में आया है, तब से निरंतर पलायन बढ़ता ही जा रहा है. पलायन आयोग की…

हरिद्वार में 2021 में होने वाले महाकुंभ के लिये उत्तराखंड ने केंद्र से मांगे 5000 करोड़ रुपये

हरिद्वार में 2021 में होने वाले महाकुंभ के लिये उत्तराखंड ने केंद्र से मांगे 5000 करोड़ रुपये हरिद्वार में 2021…

क्या पलायन एक चिंता/ चिंतन/ मंथन/ समय व्यतीत करने का एक जरिया/ या फिर अभ्यास का विषय है???

*पलायन* से क्या समझते है? पलायन को कैसे *परिभाषित* करेंगे? : *हर वो व्यक्ति या उसका परिवार जो पैत्रिक भूमि…

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने नेपाल और तिब्बत को जोड़ने वाली पर्वत श्रृंखला मकालु पर चढ़ाई के दौरान जनपद पिथौरागढ़ निवासी भारतीय सेना के कुमाऊं स्काउट के जवान श्री नारायण सिंह परिहार के आकस्मिक निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने नेपाल और तिब्बत को जोड़ने वाली पर्वत श्रृंखला मकालु पर चढ़ाई के दौरान जनपद पिथौरागढ़ निवासी भारतीय सेना के कुमाऊं स्काउट के जवान श्री नारायण सिंह परिहार के आकस्मिक निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत की आत्मा की शांति एवं दुःख की इस घड़ी में उनके परिजनों को धैर्य प्रदान करने की ईश्वर से कामना की है। इस संबंध में हेडक्वार्टर उत्तराखण्ड सब एरिया देहरादून के कर्नल ओ.पी.फरस्वाण ने जानकारी दी कि भारतीय सेना का दल पिछले माह नेपाल और तिब्बत को जोड़ने वाली पर्वत श्रंखला मकालु में चढ़ने के लिए गया था। इस दल में कनार गांव के निवासी नारायण सिंह परिहार भी शामिल थे। यह साहसिक दल 8485 मीटर ऊंची चोटी पर दल चढ़ने में सफल रहा लेकिन वापस लौटते समय यह दुर्घटना घट गई। इसी दौरान हिमस्खलन हुआ और वे बर्फ में दब गए, जिससे उनका निधन हो गया।