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उत्तराखण्ड किसान सभा के आह्ववान पर 30 मई किसान दिवस के अवसर पर राजधानी देहरादून मे विधानसभा पर विशाल प्रर्दशन करेगी उक्त आशय का निर्णय किसान सभा राज्य कौसिंल की बैठक मे लिया गया ।किसान सभा इससे पूर्व तहसीलों, जिलों मे प्रर्दशन करेगी ।
सेमिनार मे मुख्य वक्ता के रूप मे बोलते हुए अखिल भारतीय संयुक्त मन्त्री बीजू कृष्णनन ने किसानों की समस्या पर बिस्तारित रूप से चर्चा की तथा कहा है कि मोदी सरकार के कार्य काल मे किसानों की भारी उपेक्षा हुई ।साथ ही किसानों की आत्महत्याओ मे भारी बृध्दि हुई है ।उन्होंने कहा है कि किसानों की समस्या के लिए हाल ही के बर्षो मे किसान सभा ने संयुक्त संधर्ष को मजबूत करने का कार्य किया है ।
सेमिनार को सम्बोधित करते हुए किसान सभा के हिमाचल प्रदेश के महामन्त्री डा0 कुलदीप तंवर ने कहा है कि जंगली जानवरों व आवारा पशुओं के कारण आज किसानों को भारी नुकशान उठाना पडा है ।हिमाचल प्रदेश मे इन समस्याओं को लेकर हमनें सुनियोजित तरीक़े सै कार्य कर किया तथा सतत् संघर्ष के माध्यम से इस समस्या पर बहुत कुछ रोकथाम की है ।साथ ही राज्य मे नुकसान पहुंचा रहे जंगली जानवरों तथा बन्दरो तथा जंगली सुअरों को किसान के शत्रु घोषित कराने मे सफलता हासिल हुई है । इस पर भारत सरकार द्वारा हमारे राज्य के लिये अधिसूचना जारी की गई ।।इसी प्रकार की व्यवस्था उत्तराखण्ड व अन्य पहाड़ी राज्यों के लिये होनी चाहिए ।उन्होंने कहा है कि शुरुआती दौर मे इस कार्य के संचालन मे काफी दिक्कत आयी इस के लिए किसान सभा द्वारा जागरूकता के लिए भारत ज्ञान विज्ञान समिति की भी मदद ली गई।उन्होंने इस सन्दर्भ मे संयुक्त आन्दोलन विकसित करने पर जोर दिया ।
जवाहर लाल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विकास रावल ने सेमिनार मे बोलते हुए कहा है कि सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान जनता काफी दुखद स्थिति मे है ।सरकार की नीति कृषि व पशुओं के बारे अस्पष्ट व भभ्रम फैलाने वाली है । जिसके दुष्प्रभाव सामने हैं ।सरकार के पशु व्यवसाय पर प्रतिबन्ध के कारण अर्थ व्यवस्था पर इसका भारी कुपप्रभाव पड रहा है । इस व्यवसाय से जुड़ी हजारों लोग भुखमरी के कगार पर है ।आज इन पशुओं के लिए चारा तथा विशाल बजट की आवश्यकता है ।एक अनुमान के अनुसार सरकार द्वारा निर्धारित वर्तमान बजट के मुकाबले 35 %अधिक बजी की आवश्यकता होगी ।

इस अवसर हिमाचल के साथियों ने जागरूकता के लिए एक सिलाईड शो दिखाई गई जिसमे यह प्रर्दशित किया कि किन परिस्थितियों मे हिमाचल के साथियों इस मुद्दों को लेकर किसानों के बीच कार्य किया तथा क्या क्या दिक्कतें आयी किस तरह सफलता मिली ।साथ ही इस मुद्दों पर किस तरह कार्य किए जाने चाहिए ।आदि आदि ।
सेमिनार की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष सुरेन्द्र सिह सजवाण ने की सेमिनार का मूल प्रस्ताव प्रान्तीय महामंत्री गंगाधर नौटियाल ने रखा जिसमे राज्य मे जंगलों जानवरों ,बन्दरो से खेती व जनहानि तथा पालतू आवारा पशुओं से हो रही क्षति के सन्दर्भ मे चर्चा की गई ।रिपोर्ट मे किसान सभा के संघर्ष तथा प्रयासो की चर्चा की गई ।राज्य सरकारों की उदासीनता की भी चर्चा रिपोर्ट मे की गई ।
रिपोर्ट पर जनपद देहरादून चमोली रूद्रप्रयाग ,हरिद्वार ,पौडी टिहरी उधमसिह नगर ,नैनीताल जिलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सेदारी की तथा अपने बहुमूल्य सुझाव एव अनुभव रखे ।
सेमिनार मे तीन बिन्दुओं पर प्रमुख रूप से चर्चा हुई इन्हीं बिन्दुओं पर राज्य की परिस्थितियों के इर्द गिर्द संधर्ष का निर्णय लिया गया । हिमाचल की तर्ज साथियों ने आने वाले दिनों इस सन्दर्भ मे पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
1जंगली जानवरों द्वारा पालतू पशुओं को मारे जाने पर उतराखण्ड सरकार द्वारा क्षतिपूर्ति की वर्तमान दरो की समीक्षा हो ।
2 जंगली जानवरों द्वारा मानव शरीर पर की गई क्षति की अनुग्रह राशि मे सुधार किया जाए ।
3 क्षतिपूर्ति का भुगतान सरल किया जाए ।
4 रेगुलेशन आफ लाईव्स स्टोक मार्केटस रूल्स 2017 समाप्त कर पूर्व स्थिति बहाल की जाए ।
5 हिमाचल की तरह नुकसान पहुंचाने वाले बन्दर ,जंगली सुअर आदि किसानों का दुश्मन घोषित किया जाए ।
6जंगली जानवरों ध्दारा मानव को क्षति पहुंचाने पर मोटर वैक्लि एक्ट के प्रावधानो तहत क्षतिपूर्ति दी जाए ।
7 फसलों के लिये निशुल्क बीमे का प्रावाधान किया जाए ।
सेमिनार किसान सभा के प्रान्तीय उपाध्यक्ष बच्चीराम कौसवाल ,कोषाध्यक्ष शिवपप्रसाद देवली ,उपाध्यक्ष कमरूद्दीन ,भगवान सिंह राणा रिटायर्ड कन्सवैटर फौरेस्ट श्री पाण्डेय ,शिक्षक नेता प्रेमसिह गुसाईं तथा अनेक वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए ।
गंगाधर नौटियाल
महामन्त्री


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By udaen

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