Spread the love

डेयरी पर बिकने वाले दूध, घी और पनीर पर आंख मूंदकर भरोसा मत कीजिए। क्योंकि मिलावटखोरों पर लगाम नहीं लग रही है। खाद्य सुरक्षा विभाग खानापूर्ति के लिए दुग्ध उत्पादों के सैंपल जरूर लेता रहा है, पर हाल के दिनों में कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है। जिस कारण अब खाद्य कारोबारी निडर होकर मिलावट कर रहे हैं। आम लोग बाजार से दूध, घी और पनीर नहीं, बल्कि बीमारी खरीद रहे हैं।

पिछले एक दशक में शहर की जनसंख्या तेजी से बढ़ी है। इसी के साथ खाद्य पदार्थों और दुग्ध उत्पाद की डिमांड भी कई गुना बढ़ गई है। यही वजह है कि कुछ मिलावटखोर ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए आम आदमी की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। मिलावट पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा विभाग की है। पर वह भी महज खानापूर्ति ही कर रहा है।

कार्रवाई के नाम पर बस प्रतिष्ठानों पर सैंपलिंग भर की जाती है। जिनका रिजल्ट कई-कई माह बाद आता है। तब तक मिलावट का जहर आम आदमी के हलक के नीचे उतर चुका होता है। उस पर हाल फिलहाल विभाग ने मिलावट पर ऐसी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की, जिसे लेकर अधिकारियों की पीठ थपथपाई जाए। अब जब नकली पनीर और घी बनाने का भंडाफोड़ हुआ है तो वह भी पुलिस माध्यम बनी।

तीन तरीकों से करें नकली पनीर की पहचान 

– पनीर का टुकड़ा हाथ में मसलकर देखें। अगर यह टूटकर बिखरे तो समझ लीजिए मिलावटी है, क्योंकि इसमें मौजूद कैमिकल दबाव नहीं सह पाता।

– पनीर को पानी में उबाल ठंडा कर लें। ठंडा हो जाए तो उस पर कुछ बूंदें आयोडीन टिंचर की डालें। अगर पनीर का रंग नीला पड़ जाए तो समझ लीजिए कि यह मिलावटी है।

– नकली पनीर ज्यादा टाइट होता है। उसका टैक्सचर रबड़ की तरह होता है।

ऐसे करें नकली घी की पहचान 

– एक कटोरी में एक चम्मच घी में चार बूंद हाइड्रो क्लारिक एसिड और एक चुटकी चीनी मिलाने पर यदि घी का रंग चटक लाल हो जाए तो घी में डालडा मिलाया गया है।

– एक चम्मच घी में चार से पांच बूंद आयोडीन मिलाएं, घी का रंग नीला पड़े तो उबला हुआ आलू मिलाया गया गया।

– एक चम्मच घी में दो एमएल हाइड्रो क्लोरिक एसिड डालने पर घी लाल हो जाए तो कोलतार डाई का प्रयोग किया गया है।

– थोड़ा सा घी लेकर हथेली के पीछे भाग में रगड़ें, यदि 25 मिनट में ही घी की सुगंध चली जाए तो मिलावटी घी होगा।

 

नकली घी, पनीर यानी बीमारी को न्योता 

वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. प्रवीण पंवार के अनुसार, मिलावटी दूध, पनीर और घी खाने से हृदय, लिवर, किडनी, आंत को नुकसान पहुंचता है। इसके साथ ही पेट की बीमारी और कैंसर तक हो सकता है। साथ ही कैमिकल बच्चों को मानसिक और शारीरिक रूप से बहुत कमजोर कर देते हैं। कई बार इन कैमिकल के कारण नपुंसकता और अपंगता के भी मामले सामने आए हैं।

 


Spread the love

By udaen

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *