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मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) में अब नक्शों को लटकाकर रखने का खेल खत्म हो जाएगा। क्योंकि अब त्रुटिपूर्ण या बिल्डिंग बायलॉज (भवन उपविधि) के नियमों से इतर बने नक्शे स्वीकार ही नहीं किए जाएंगे। इसके लिए एमडीडीए ने ई-ऑफिस परियोजना के तहत नक्शे पास करने का नया सॉफ्टवेयर तैयार किया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, आवास और शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने इस सॉफ्टवेयर को लॉन्च किया।

सॉफ्टवेयर पर जानकारी देते हुए एमडीडीए उपाध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि इसमें बिल्डिंग बायलॉज की पूरी जानकारी है। जैसे ही आर्किटेक्ट किसी नक्शे को दाखिल करेंगे तो सॉफ्टवेयर स्वत: ही आकलन कर लेगा कि नक्शा नियमों के अनुरूप बना है या नहीं। यदि नियमों में जरा भी ऊंच-नीच पाई गई तो सॉफ्टवेयर इसे स्वीकार ही नहीं करेगा। अब तक त्रुटिपूर्ण नक्शे भी दाखिल हो जाते थे और उन पर विभिन्न स्तर पर आपत्तियां लगती रहती थीं। इसके चलते न सिर्फ एमडीडीए में लंबित नक्शों की संख्या बढ़ रही थी, बल्कि कई तरह के आरोप भी लगते रहते थे। अब जो नक्शा दाखिल होगा, उसका मतलब यह है कि उसे पास होना ही है।

इसके बाद भी यदि किसी पटल पर ऐसी फाइल लंबित रहती है, तो पूर्व से प्रचलित कलर कोडिंग व्यवस्था उसे पकड़ लेगी और लाल निशान पाए जाने पर संबंधित पटल प्रभारी को नोटिस भी जारी कर दिया जाएगा। इस अवसर पर सचिव आवास नितेश झा, प्राधिकरण सचिव जीसी गुणवंत, एसएल सेमवाल, सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर संजीवन सूंठा आदि उपस्थित रहे।

वन टाइम सेटलमेंट के 132 नक्शे लटके जिन अवैध निर्माण को वैध करने के लिए सरकार ने वन टाइम सेटलमेंट स्कीम को लागू किया था, उसमें भी 132 निर्माण अब तक वैध नहीं हो पाए हैं। यानी कि यह नक्शे लंबित चल रहे हैं। अगर सॉफ्टवेयर की नई प्रणाली पहले से लागू होती, तो त्रुटिपूर्ण नक्शे न तो दाखिल हो पाते, न ही वह लंबित रहकर प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर अनावश्यक रूप से प्रश्नचिह्न लगा पाते।


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By udaen

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