‘नमामि गंगे‘ के तहत जिला गंगा कमेटी की समीक्षा बैठक
जिलाधिकारी श्री धीराज सिंह गब्र्याल ने आज नगर पालिका सभागार श्रीनगर गढ़वाल में संबंधित अधिकारियों के साथ ‘नमामि गंगे‘ के तहत जिला गंगा कमेटी की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने उक्त योजना के तहत संबंधित विभागों से अद्यतन कार्य प्रगति की जानकारी ली। इस दौरान जल निगम एवं जल संस्थान द्वारा एसटीपी लाइन के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया गया कि श्रीनगर नगर पालिका क्षेत्र में कुल 17 नाले हैं तथा लगभग साढे़ चार एमएलटी के दो एसटीपी हैं। इन 17 नालों में से 13 नाले एसटीपी से जुड़ चुके हैं, जबकि चार नाले एनएच आॅलवेदर कार्य के चलते अभी लम्बित है, जिस पर जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को आपसी समजस्य बनाते हुए 10 दिन के अन्दर इन नालांे को एसटीपी से जोड़ने के निर्देश दिये। वहीं उन्होंने ठोस एवं तरल कूड़ा निस्तारण हेतु संबंधित अधिकारियों को कार्यों में तेजी लाने के आवश्यक निर्देश दिये, जबकि तहसीलदार श्रीनगर को निर्देशित किया कि मेडिकल काॅलेज प्रबन्धन को मेडिकल वैस्ट को लेकर 133 के तहत नोटिस जारी करने के निर्देश दिये। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि अपनेअपने दायित्व वाले कार्य निरन्तर चलते रहंेगे, लेकिन दायित्व के साथसाथ अधिकारी कुछ ऐसा अच्छा कार्य करें, जिससे उसकी एक अलग पहचान बन सके। कहा कि जिस क्षेत्र में तैनात हों, उस क्षेत्र को अपना समझकर कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने ईओ नगर पालिका एवं तहसीलदार श्रीनगर को सरकारी काॅलोनियों में कम्पोस्टिंग पिट एवं शैड बनाने हेतु आवश्यक दिशानिर्देश दिये। समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि 70 प्रतिशत कूड़ा गीला होता है अगर सोर्स सेगरिगेशन करने के बाद डोर टू डोर कलेक्शन कर कम्पोस्टिंग की जाय, तो 30 प्रतिशत सूखा कूड़ा बचता है, जिसको शैड बनाकर उसमें सूखाया जाय तथा सूखने के बाद अलगअलग करने के बाद 10 प्रतिशत कूड़ा की डम्पिंग यार्ड मंे डाला जा सकता है। कम्पोस्टिंग करने से खाद भी बनेगी और नगर पालिका की इनकम भी होगी। उन्होंने वार्डों में कूड़ा कम्पोस्टिंग के लिए सरकारी भूमि चिन्ह्ति कर पिट बनाने तथा सोर्स सेगरियेशन के बाद डिग्रेडिएबल (नष्ट होने योग्य) कूड़ा को उसमें डालने और नाॅन डिग्रेडिएबल के लिए शैड बनाने के निर्देश दिये। कहा कि सोर्स सेगरिगेशन और डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन करने के बाद डम्पिंग यार्ड की जरूरत ही नहीं पड़ेगी, उसके कम्पोस्टिंग शुरू कर देना है और इससे 80 प्रतिशत कूड़ा ऐसे ही निकल जायेगा। उन्होंने हर नगर पालिका के वार्डों के बाहर, जहां भी सरकारी जमीन उपलब्ध है, उन जगहों पर कम्पोस्टिंग पिट तथा स्टोरेज के लिए शैड बनाने तथा सरकारी काॅलोनियों में जिस भी विभाग की कालोनी हो, उस विभाग द्वारा कम्पोस्टिंग पिट बनाये जाने के निर्देश दिये। जिलाधिकारी ने अधिशासी अधिकारी नगर पालिका श्रीनगर को निर्देशित करते हुए कहा कि वार्डों में स्वच्छता समिति का गठन कर प्रत्येक वार्ड में वार्ड सदस्य को संरक्षक के रूप में नामित करते हुए एक सप्ताह के भीतर कूड़े का प्रबन्धकीय तरीके से निस्तारण करने हेतु उप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक कराना सुनिश्चित करेंगे। जिलाधिकारी ने कहा कि घरों से एसटीपी लाइन के कनेक्शन जोड़ने हेतु 43 करोड़ की योजना बनाकर भेजी गयी है, जिसके तहत 32 किमी. की लाइन बिछायी जायेगी। अधिशासी अधिकारी नगर पालिका श्रीनगर एस.पी. गुप्ता ने बताया कि श्रीनगर क्षेत्र में जिलाधिकारी की पहल से राज्य में पहली वायोरिमेडिएशन वैस्ट क्लीनिक मशीन आ चुकी है, जिसे स्थापित कर डम्पिंग कूड़े को जैविक एवं अजैविक कूड़े को प्रबन्धकीय तरीके से अलगअलग किया जायेगा। उन्होंने कहा कि श्रीनगर नगर पालिका को वैस्ट कूड़े से अब तक 07 लाख 3 हजार 131 की इनकम हुई है। इस अवसर पर डीएफओ लक्ष्मण सिंह रावत, संतराम, एसडीएम डी.एस. नेगी, सीएमओ बी.एस. जंगपांगी, सीएमएस एच.सी. मार्तोलिया, पीएम स्वजल दीपक रावत, अधिशासी अभियन्ता जल संस्थान सतेन्द्र कुमार गुप्ता, डीपीआरओ एम.एम. खान, परियोजना प्रबन्धक पेयजल निगम पी.एस. रावत, सहायक अभियन्ता जल संस्थान कृष्ण कांत, तहसीलदार सुनील राज, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका श्रीनगर एस.पी. गुप्ता, पौड़ी विनोद लाल सहित जनपद स्तरीय अधिकारी मौजूद थे। जिला सूचना अधिकारी पौड़ी गढ़वाल
