Spread the love

प्रयोगशाला में पशुओं पर वैज्ञानिक प्रयोगों के नए नियमों पर उठे सवाल, 5 नवंबर तक मांगी गईं आपत्तियां

नई दिल्ली। वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए प्रयोगशालाओं में इस्तेमाल किए जाने वाले पशुओं के संरक्षण को लेकर केंद्र सरकार के प्रस्तावित नए नियमों पर सार्वजनिक चर्चा शुरू हो गई है। भारत सरकार के पशुओं पर प्रयोगों के नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण संबंधी समिति (CCSEA) ने Prevention of Cruelty to Animals (Control and Supervision of Experiment, Breeding and Trading of Laboratory Animals) Rules, 2026 का मसौदा सार्वजनिक करते हुए नागरिकों और संबंधित पक्षों से आपत्तियां एवं सुझाव आमंत्रित किए हैं।

यह मसौदा 30 सितंबर 2026 को जारी अधिसूचना G.S.R. 864(E) के तहत तैयार किया गया और 6 अक्टूबर को राजपत्र में प्रकाशित हुआ। इसका उद्देश्य वर्ष 1968 और 1998 के पुराने नियमों के स्थान पर नया नियामक ढांचा तैयार करना है। आपत्तियां और सुझाव भेजने की अंतिम तिथि 5 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है।

किन प्रावधानों पर हो रही है चर्चा?

1. प्रयोगों की अनुमति का अधिकार: मसौदे के नियम 11(3) के अनुसार हल्के और मध्यम श्रेणी के प्रयोगों को संस्थान की अपनी Institutional Animal Ethics Committee (IAEC) मंजूरी दे सकती है। ऐसे मामलों में सभी प्रस्तावों को सीधे केंद्रीय समिति के पास भेजना आवश्यक नहीं होगा।

2. पशुओं की खरीद और स्रोत: नियम 21(2) के तहत कुछ बड़े पशुओं, मछलियों और पक्षियों की उपलब्धता पंजीकृत स्रोतों से नहीं होने पर IAEC की पूर्व अनुमति और पशु चिकित्सक द्वारा प्रमाणित क्वारंटीन जैसी शर्तों के साथ गैर-पंजीकृत स्रोतों या खुले बाजार से खरीद की अनुमति का प्रावधान है।

3. स्वतंत्र निगरानी का सवाल: संस्थान की अपनी नैतिकता समिति द्वारा प्रयोगों को मंजूरी देने की व्यवस्था में बाहरी निगरानी, हितों के टकराव से बचाव और पारदर्शिता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा।

4. पशु कल्याण और मानवीय व्यवहार: मसौदे में Replacement, Reduction और Refinement यानी 3R सिद्धांतों, पशु चिकित्सक की निगरानी, प्रयोगों की गंभीरता के वर्गीकरण, निरीक्षण और अभिलेखों के रखरखाव जैसे प्रावधान भी शामिल हैं।

नागरिकों के सामने महत्वपूर्ण सवाल

क्या किसी भी पशु पर प्रयोग करने से पहले गैर-पशु वैकल्पिक वैज्ञानिक तरीकों को प्राथमिकता दी जाएगी? क्या प्रयोगशालाओं की नैतिकता समितियां संस्थागत दबाव से मुक्त रह सकेंगी? पशुओं की खरीद, परिवहन, प्रयोग के बाद पुनर्वास और मृत्यु की परिस्थितियों की स्वतंत्र निगरानी कैसे होगी?

पशु कल्याण से जुड़े संगठनों और नागरिकों के लिए ये महत्वपूर्ण सवाल हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान और पशु संरक्षण के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है, लेकिन अनुसंधान के नाम पर पशुओं को अनावश्यक पीड़ा से बचाने के लिए प्रभावी निगरानी भी उतनी ही जरूरी है।

कैसे भेजें अपनी आपत्ति?

इच्छुक नागरिक 5 नवंबर 2026 तक अपनी लिखित आपत्ति और सुझाव ईमेल के माध्यम से भेज सकते हैं।

ईमेल: cpcsea-mef@gov.in

प्राप्तकर्ता: सदस्य सचिव, CCSEA, भारत सरकार।

पशु अपनी पीड़ा और अधिकारों के बारे में स्वयं सार्वजनिक मंचों पर आवाज नहीं उठा सकते। ऐसे में उनके संरक्षण से जुड़े नियमों पर नागरिकों की भागीदारी महत्वपूर्ण है।

सवाल केवल वैज्ञानिक प्रयोगों का नहीं, बल्कि उन जीवों के प्रति हमारी मानवीय जिम्मेदारी का भी है जो अपनी पीड़ा व्यक्त करने के लिए हमारी भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

स्रोत: CCSEA की आधिकारिक वेबसाइट एवं G.S.R. 864(E), Draft Rules 2026।


Spread the love

By udaen

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *