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लोकतंत्र में हर वोट की अहमियत: अंजलि भारद्वाज ने उठाए मतदाता अधिकारों से जुड़े सवाल

आरटीआई और सरकारी जवाबदेही की लड़ाई से जुड़ा नाम, दिल्ली SIR प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में उठाए मतदाता अधिकारों के सवाल।

विशेष परिचय: अंजलि भारद्वाज – सूचना के अधिकार से लोकतांत्रिक जवाबदेही तक की लड़ाई

व्यक्तित्व एवं समसामयिक समाचार

Social Activist Anjali Bhardwaj among 12 Anti-Corruption Champions recognised by US
Who Is Anjali Bhardwaj, The Activist Honoured By The US For Her Fight In Combating Corruption?
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नई दिल्ली। भारत में सूचना का अधिकार, सरकारी पारदर्शिता, भ्रष्टाचार के विरुद्ध नागरिक भागीदारी और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही के मुद्दों पर लंबे समय से सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज इन दिनों दिल्ली की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चर्चा में हैं।

अंजलि भारद्वाज का काम केवल आरटीआई आवेदन दाखिल करने तक सीमित नहीं रहा है। उन्होंने सूचना को आम नागरिकों के अधिकार, सरकारी योजनाओं की निगरानी और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही से जोड़ने का प्रयास किया है।

1. कौन हैं अंजलि भारद्वाज?

अंजलि भारद्वाज दिल्ली की सामाजिक कार्यकर्ता और सूचना के अधिकार आंदोलन से जुड़ी प्रमुख आवाजों में शामिल हैं।

  • सतर्क नागरिक संगठन (Satark Nagrik Sangathan) की संस्थापक सदस्य।
  • राष्ट्रीय जन सूचना अधिकार अभियान (NCPRI) की सह-संयोजक।
  • सरकारी पारदर्शिता और जवाबदेही के क्षेत्र में दो दशकों से अधिक का अनुभव।
  • कॉमन कॉज के गवर्निंग बोर्ड की सदस्य।
  • सूचना के अधिकार और भ्रष्टाचार विरोधी नागरिक अभियानों में सक्रिय भूमिका।

उनका संगठन वर्ष 2003 से नागरिकों को सूचना के अधिकार के माध्यम से सरकारी सेवाओं और सार्वजनिक संस्थाओं के प्रति जवाबदेह बनाने का काम कर रहा है।

2. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान

Biden administration honours Indian activist Anjali Bhardwaj with Anti-Corruption Champions Award

International Anti-Corruption Champions Award – 2021

अमेरिका के विदेश विभाग ने फरवरी 2021 में अंजलि भारद्वाज को पहले अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी चैंपियन पुरस्कार से सम्मानित किया था।

यह सम्मान सरकारी पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार विरोधी प्रयासों में उनके योगदान के लिए दिया गया।

3. दिल्ली SIR मामला: अंजलि भारद्वाज की सुप्रीम कोर्ट में याचिका

Who Is Anjali Bhardwaj, The Activist Honoured By The US For Her Fight In Combating Corruption?
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अक्टूबर 2026 में अंजलि भारद्वाज और सामाजिक कार्यकर्ता अमृता जोहरी ने दिल्ली की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

इस याचिका में मुख्य रूप से निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं को जारी किए गए नोटिस के आधार पर सवाल उठाए गए।

याचिका में उठाए गए प्रमुख सवाल:

  • मतदाता सूची से जिन लोगों के नाम हटाए गए, उनकी पूरी सूची सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
  • किन आधारों पर मतदाताओं को ‘Logical Discrepancy’ यानी तार्किक विसंगति की श्रेणी में रखा गया?
  • नोटिस जारी करने के लिए इस्तेमाल किए गए मानदंड, परिभाषाएं और तकनीकी प्रक्रिया क्या हैं?
  • पहले से पंजीकृत मतदाताओं को नए मतदाता की तरह फॉर्म-6 भरने के लिए क्यों कहा जा रहा है?

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत में पक्ष रखा।

4. 47 लाख मतदाताओं का मामला और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

दिल्ली में SIR प्रक्रिया के दौरान लगभग 47.57 लाख मतदाताओं के नाम प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए थे। उन्हें ASDD श्रेणी में रखा गया, जिसमें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरे पंजीकरण जैसे मामले शामिल हैं।

28 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण सवाल उठाए।

अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पहले से मतदाता सूची में दर्ज था और काम के सिलसिले में कुछ समय के लिए दूसरे स्थान पर चला गया, तो उसे स्थायी रूप से स्थानांतरित मान लेना उचित नहीं है।

अदालत ने यह भी सवाल किया कि पहले से मतदाता रहे व्यक्ति को नए मतदाता के लिए निर्धारित फॉर्म-6 भरने के लिए क्यों कहा जा रहा है।

न्यायालय ने निर्वाचन आयोग से ऐसे लोगों को फिर से गणना प्रपत्र (Enumeration Form) अथवा पता बदलने की स्थिति में फॉर्म-8 भरने की सुविधा देने पर विचार करने को कहा।

महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने ‘Logical Discrepancy’ श्रेणी की वैधानिकता पर अभी अंतिम निर्णय नहीं दिया है।

5. 29 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस

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29 अक्टूबर को अंजलि भारद्वाज, प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नई दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

इसमें निर्वाचन आयोग के सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे, SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों पर चर्चा की गई।

अंजलि भारद्वाज ने इस बात पर जोर दिया कि जिन नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करने और दोबारा सूची में शामिल होने का सरल अवसर मिलना चाहिए।

6. सूचना का अधिकार और अंजलि भारद्वाज का व्यापक अभियान

अंजलि भारद्वाज का काम केवल मतदाता सूची तक सीमित नहीं है।

उनकी सक्रियता के प्रमुख क्षेत्र हैं:

कार्यक्षेत्रप्रमुख उद्देश्य
सूचना का अधिकारसरकारी सूचनाओं तक नागरिकों की पहुंच
सरकारी जवाबदेहीअधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी तय करना
भ्रष्टाचार विरोधसार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता
सामाजिक सुरक्षाराशन, पेंशन और रोजगार जैसी सुविधाओं तक पहुंच
लोकतांत्रिक सुधारनागरिक भागीदारी और संस्थागत पारदर्शिता

सतर्क नागरिक संगठन ने दिल्ली की बस्तियों में पानी, बिजली, स्वच्छता और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए आरटीआई को नागरिकों के हाथ में एक प्रभावी साधन बनाने का काम किया।

संगठन ने सांसदों और विधायकों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड सार्वजनिक करने तथा स्थानीय विकास निधि के उपयोग की जानकारी सार्वजनिक करने जैसे प्रयास भी किए हैं।

7. आरटीआई कानून को लेकर उनकी चिंता

अंजलि भारद्वाज का मानना है कि सूचना का अधिकार नागरिकों को केवल सरकारी दस्तावेज उपलब्ध कराने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र में सार्थक भागीदारी की बुनियाद है।

एक हालिया साक्षात्कार में उन्होंने आरटीआई कानून के कमजोर होते प्रभाव, लोकपाल संस्था की कार्यप्रणाली और निर्वाचन आयोग से संबंधित सूचनाओं की उपलब्धता पर चिंता व्यक्त की।

उनका तर्क है कि जब तक नागरिकों को सरकारी फैसलों की प्रक्रिया, उनके पीछे के कारण और जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी नहीं मिलेगी, तब तक संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित करना कठिन होगा।

8. महत्वपूर्ण संदर्भ और समाचार स्रोत

आगे की पत्रकारिता और तथ्य सत्यापन के लिए ये रिपोर्ट उपयोगी हैं:

आधिकारिक सोशल मीडिया: @AnjaliB_ – Anjali Bhardwaj

अंजलि भारद्वाज की सक्रियता भारतीय लोकतंत्र के एक महत्वपूर्ण पहलू की ओर ध्यान आकर्षित करती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचन आयोग, सरकारी विभागों और सार्वजनिक संस्थाओं की स्वतंत्रता के साथ-साथ उनकी पारदर्शिता भी जरूरी है।

उनके काम का केंद्रीय विचार यही है कि नागरिक को सरकारी व्यवस्था का निष्क्रिय लाभार्थी नहीं, बल्कि सवाल पूछने और जवाब मांगने का अधिकार रखने वाला सक्रिय भागीदार होना चाहिए।

पत्रकारिता के लिए यह एक महत्वपूर्ण विषय है: लोकतंत्र में सत्ता से सवाल पूछना किसी संस्था के विरुद्ध होना नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों और संवैधानिक जवाबदेही को मजबूत करना है।


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By udaen

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