Spread the love


कोटद्वार। सरोजिनी देवी लोक कल्याण विकास समिति के तत्वावधान में कोटद्वार में राजकीय स्वास्थ्य सेवाओं सुधार सहित डाइलिस केन्द्र स्थापना की प्रेरक सरोजिनी देवी की 15 वीं पुण्य तिथि पर उनका पुण्य स्मरण करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए गये।

इस अवसर पर प्रोफेसर नन्द किशोर ढौंडियाल की अध्यक्षता में आयोजित उत्तराखण्ड में भू प्रबंधन एवं पर्यावरण संरक्षण विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने उत्तराखण्ड में विरासत में मिले प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर दिया। चर्चा की शुरुआत करते हुए गोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ प्रेम बहुखण्डी ने कहा कि, भूमि पर हमारा स्वामित्व अस्थाई है। यह हमारे पूर्वजों की धरोहर है तथा भूमि की प्राकृतिक सम्पदा, उर्वरता और पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों को सौंपना हम सब का दायित्व है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हम भू स्वामी नहीं बल्कि अतीत और भविष्य की पीढ़ियों के बीच इस विरासत के संरक्षक हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड सहित हिमालयी क्षेत्रों में भूमि एवं वन प्रबंधन स्थानीय समुदायों के अधिकार, जरूरतों तथा आजीविका से गहरा सम्बन्ध रहा है। स्थानीय समुदाय संसाधनों के मात्र उपयोग कर्ता नहीं बल्कि उनके संरक्षक एवं प्रबन्धन के महत्वपूर्ण भागीदार हैं। वरिष्ठ पत्रकार नागेन्द्र उनियाल ने बंजर होते खेतों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि, पर्वतीय क्षेत्रों में सीढ़ीदार खेतों में पहले जुताई होने से जल संरक्षण होता था परन्तु अब बंजर होने से वर्षा जल बंजर भूमि के कारण बह जाता है जिसके कारण जल संकट बढ़ता जा रहा है। हमारे धारे-नौले, गाड-गधेरे सूखते जा रहे हैं। नीति आयोग की एक रिपोर्ट में उत्तराखण्ड के लगभग 60 प्रतिशत प्राकृतिक जलस्रोत सूख चुके हैं या सूखने के कगार पर हैं। यह आने वाले समय में गम्भीर जल संकट को न्यौता दे रहे हैं। उचित भू प्रबंधन से ही जल एवं पर्यावरण संरक्षण सम्भव है। डॉ पद्मेश बुड़ाकोटी ने कहा कि कृषि भूमि पर अतिक्रमण तथा गैर कृषि कार्य होने से उत्तराखण्ड में कृषि योग्य भूमि का रकबा घट रहा है। यह आने वाले समय के लिए शुभ संकेत नहीं है। आज कृषि को बचाने की आवश्यकता है। मुख्य अतिथि चकबन्दी के प्रणेता गणेश सिंह गरीब ने कहा कि, पर्वतीय क्षेत्रों में जोत चकबन्दी अनिवार्य है। चकबन्दी आर्थिक समृद्धि का मूल मंत्र है। सम्पत्ति नेगी ने कविता पाठ के माध्यम से चकबन्दी किये जाने पर जोर दिया।
गोष्ठी में एस. पी. कुकरेती, चित्रमणी देवलियाल आदि वक्ताओं ने भी सम्बोधित किया। आयोजक राजेन्द्र सिंह नेगी ने उपस्थित सभी जनों का आभार व्यक्त किया। मंच का संचालन सुभाष चन्द्र नौटियाल ने किया।
इस अवसर पर गजे सिंह नेगी, चन्द्र सिंह नेगी, कुंवर सिंह, राजेन्द्र सिंह,अन्नपूर्णा जोशी आदि उपस्थित थे।


Spread the love

By udaen

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *