प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संदीप काले का पत्र; पत्रकारों और टेलीविजन उद्योग के संरक्षण की मांग
नई दिल्ली : देश में पत्रकारिता और टेलीविजन क्षेत्र पर टीआरपी की प्रतिस्पर्धा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कॉस्ट कटिंग और बढ़ते रोजगार संकट को देखते हुए टीआरपी व्यवस्था को स्थायी रूप से बंद करने की मांग वॉइस ऑफ मीडिया (VOM) इंटरनेशनल फोरम के संस्थापक एवं अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप काले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की है। साथ ही टीएएम सहित मीडिया की तुलनात्मक रेटिंग एवं मापन व्यवस्थाओं की समीक्षा कर पत्रकारों, मीडिया कर्मियों और टेलीविजन उद्योग के संरक्षण के लिए व्यापक राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग भी की गई है।
इस संबंध में संदीप काले ने प्रधानमंत्री को विस्तृत ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में कहा गया है कि टीआरपी की प्रतिस्पर्धा के कारण पत्रकारों, संपादकों, डेस्क कर्मचारियों, रिपोर्टरों, कैमरामैन और तकनीकी कर्मचारियों पर लगातार काम का दबाव बढ़ता है। ब्रेकिंग न्यूज, खबरों की गति और रेटिंग की दौड़ का मीडिया कर्मियों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। विभिन्न संवादों और सर्वेक्षणों में भी यह चिंता सामने आई है।
पिछले कुछ महीनों से टीआरपी व्यवस्था बंद होने के कारण मीडिया क्षेत्र के कर्मचारियों को अपेक्षाकृत संतोषजनक और कम तनावपूर्ण वातावरण में काम करने का अवसर मिल रहा है। वॉइस ऑफ मीडिया के निरीक्षण में यह बात सामने आने का दावा किया गया है। इसलिए टीआरपी को दोबारा शुरू करने के बजाय इसे स्थायी रूप से बंद करने पर सरकार को विचार करना चाहिए।
ज्ञापन में कहा गया है कि केवल टीआरपी बंद करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। टीएएम सहित मीडिया संस्थानों के प्रदर्शन की लगातार तुलना करने वाली विभिन्न रेटिंग और मापन व्यवस्थाओं की भी समीक्षा आवश्यक है। पत्रकारिता का केंद्र रेटिंग और व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि जनहित, सत्य, सामाजिक मुद्दे और लोकतंत्र की मजबूती होना चाहिए।
एआई और कॉस्ट कटिंग से रोजगार पर संकट
मीडिया क्षेत्र के सामने चुनौतियां अब केवल टीआरपी तक सीमित नहीं हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन, कॉस्ट कटिंग और मीडिया संस्थानों के स्वामित्व में बदलाव के कारण रोजगार का नया संकट पैदा हो रहा है।
वॉइस ऑफ मीडिया ने स्पष्ट किया है कि वह एआई या तकनीकी विकास के खिलाफ नहीं है। लेकिन तकनीक का उपयोग मनुष्य के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उसकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए। अनुभवी पत्रकारों और मीडिया कर्मचारियों को नौकरी से हटाने के बजाय उन्हें पुनः प्रशिक्षण, कौशल विकास और नई तकनीकों का प्रशिक्षण देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
टेलीविजन उद्योग को बचाने की आवश्यकता
टेलीविजन उद्योग केवल कुछ बड़े मीडिया समूहों का व्यवसाय नहीं है। इससे पत्रकार, संपादक, रिपोर्टर, डेस्क कर्मचारी, कैमरामैन, तकनीकी कर्मचारी और हजारों प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार जुड़े हुए हैं।
इसलिए टेलीविजन उद्योग की आर्थिक एवं रोजगार संबंधी स्थिरता के लिए केंद्र सरकार को विशेष नीति बनानी चाहिए। केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयास से मीडिया क्षेत्र के लिए व्यापक राष्ट्रीय नीति तैयार की जाए, जिसमें पत्रकारों का स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा, रोजगार संरक्षण, कौशल विकास, एआई का जिम्मेदार उपयोग तथा टेलीविजन उद्योग की स्थिरता जैसे मुद्दों को शामिल किया जाए।
“देश की पत्रकारिता केवल टीआरपी के आंकड़ों की प्रतिस्पर्धा नहीं बननी चाहिए। रेटिंग की दौड़ में पत्रकार का स्वास्थ्य, रोजगार, परिवार और पत्रकारिता की गुणवत्ता खतरे में नहीं पड़नी चाहिए। पत्रकार बचेगा तो पत्रकारिता बचेगी और पत्रकारिता बचेगी तो लोकतंत्र और मजबूत रहेगा,” ऐसा संदीप काले ने प्रधानमंत्री को दिए पत्र में कहा है।
वॉइस ऑफ मीडिया (VOM) इंटरनेशनल फोरम की ओर से टीआरपी को स्थायी रूप से बंद करने तथा मीडिया क्षेत्र के लिए व्यापक राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग पर केंद्र सरकार से तत्काल सकारात्मक निर्णय लेने की अपेक्षा व्यक्त की गई है।
इस पत्र पर वॉइस ऑफ मीडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल म्हस्के, महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष विजय चोरडिया सहित देश के विभिन्न राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों के हस्ताक्षर भी हैं।
