घरों का 25,000 टन सोना बाजार में लाने की तैयारी, सरकार ला सकती है नई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम
नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश के घरों में निष्क्रिय पड़े सोने को औपचारिक अर्थव्यवस्था में लाने के लिए गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (Gold Monetisation Scheme) का नया स्वरूप लाने पर विचार कर रही है। प्रस्तावित योजना के तहत देशभर के ज्वेलर्स को “कलेक्शन पार्टनर” बनाया जा सकता है, जिससे लोग अपने घरों का सोना आसानी से जमा करा सकें।
सरकारी और उद्योग सूत्रों के अनुसार, भारत के घरों और धार्मिक संस्थानों में अनुमानित 25,000 से 30,000 टन सोना निष्क्रिय पड़ा है। यदि इसका केवल 5% भी बैंकिंग प्रणाली में आ जाए, तो देश के सोने के आयात में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। अनुमान है कि इससे करीब ₹8.5 लाख करोड़ के आयात की आवश्यकता घट सकती है।
ज्वेलर्स निभाएंगे अहम भूमिका
प्रस्तावित ढांचे में केवल बैंकों के बजाय अधिकृत ज्वेलर्स को भी कलेक्शन पार्टनर बनाया जा सकता है। इससे लोगों के लिए सोना जमा कराना आसान होगा और योजना की पहुंच बढ़ेगी। सरकार का उद्देश्य है कि निष्क्रिय सोने को वित्तीय प्रणाली में लाकर विदेशी मुद्रा की बचत की जाए और आयात पर निर्भरता कम हो।
पुरानी योजना क्यों नहीं चली?
वर्ष 2015 में शुरू की गई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी। मार्च 2025 तक इस योजना के तहत केवल करीब 38 टन सोना ही जुटाया जा सका। विशेषज्ञों का मानना है कि कम ब्याज, जटिल प्रक्रिया और लोगों की भावनात्मक व सांस्कृतिक झिझक इसके प्रमुख कारण रहे।
अर्थव्यवस्था को क्या होगा लाभ?
यदि नई योजना सफल रहती है, तो:
- सोने के आयात पर निर्भरता घटेगी।
- चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) पर दबाव कम होगा।
- विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- निष्क्रिय घरेलू संपत्ति आर्थिक गतिविधियों में उपयोग हो सकेगी।
हालांकि, अभी तक सरकार ने इस नई योजना की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन है और जल्द औपचारिक घोषणा होने की संभावना बताई जा रही है।
