विधान सभा पर्यावरण मंत्री डाॅ0 हरक सिंह रावत ने उत्तराखण्ड राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की बैठक की।
प्रदेश के वन एवं वन्य जीवए पर्यावरण एवं ठोसए अपशिष्ट निवारणए श्रमए सेवायोजनए प्रशिक्षणए आयुष एवं आयुष शिक्षा मंत्री डाॅ0 हरक सिंह रावत की अध्यक्षता में विधान सभा स्थित सभा कक्ष में उत्तराखण्ड राज्य आर्द्रभूमिॅमजसंदकेद्ध प्राधिकरणष् की राज्य स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गयी। राज्य स्तरीय वेटलैण्ड प्राधिकरण की प्रथम बैठक में उपस्थित सदस्यों द्वारा आर्द्रभूमि का महत्व पर वर्तमान में बने हुए खतरोंए स्थानीय स्तर पर इसकी उपस्थितिए इसके संरक्षण व पुनर्जिवित करने के सुझावों और माननीय सुप्रीम कोर्ट के दिशा.निर्देशों के क्रम में भारत के पर्यावरणए वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के आर्द्रभूमि संरक्षणसंरक्षण एवं प्रबन्धनद्ध नियम.2017 की कार्य योजना के बेहतर इंप्लिमेंटेशन पर विस्तार पूर्वक चर्चा की गयी। बैठक में प्रमुख वैज्ञानिक व प्रबन्धक कृषि विज्ञान केन्द्र डाॅण्एण्केण्शर्माए आर्द्रभूमि संरक्षण और प्रबन्धनद्ध नियम.2017 के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए कहा कि आर्द्रभूमि ऐसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन वाली भूमि है जो पूर्णतः अथवा आंशिक रूप से पानी से ढ़की होती है और जैव.विविधता को सन्तुलित बनाये रखने में बड़ी भूमिका अदा करती है। ऐसी साइट पानी को शुद्ध करती है। धरती में पानी की मात्रा और भूमि में नमी भी बनाये रखती है। उन्होंने कहा कि कुल 2ण्25 हेक्टेयर भूमि में 178 आर्द्रभूमि साइट उत्तराखण्ड में मौजूद है। जिसमें से 81 साइटें वन भूमि के अधीन सुरक्षित हैंए 44 साइटें नदियों के आसपास मौजूद हैं तथा 53 स्थान ऐसे हैं जो वन भूमि की परिधि से बाहर हैं। बैठक में 53 आर्द्र साइट के संरक्षण के एवं सवंर्धन पर अधिक फोकस करने पर चर्चा की गयी जो अतिक्रमण दोहन इत्यादि से खतरे में हैं। इसलिए इनका संरक्षण प्राथमिकता से करने की बात मंत्री ने कही। मा0 मंत्री ने वन भूमि से बाहर की परिधि के 53 आर्द्रभूमि स्थानों के संरक्षण हेतु राज्य स्तर पर दो कमेटियों के गठन के निर्देश दिये। पहली कमेटी जो सदस्य सचिव उत्तराखण्ड पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अध्यक्षता में तकनीकी कमेटी होगी। यह कमेटी 53 स्थानों के सर्वे करते हुए उसकी वर्तमान स्थिति के बारे में अवलोकन करेगी। कमेटी को बेहतर सर्वे के लिए एक तकनीकी सदस्य को सदस्यता देने का अधिकार दिया गया है। बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी जनपदों को नोडल ऐजेंसी वन विभाग की ओर से नोटिफिकेशन जारी किया जाय जिसमें जनपद में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक सब कमेटी का गठन किया जाएगा जिसमें जिला मुख्यालय के डीएफओ सदस्य सचिव रहेंगे साथ ही सिंचाईए प्रदूषण नियंत्रण बोर्डए राजस्व विभागए पर्यटनए इत्यादि पर्यावरण से जुड़े सभी विभाग व संस्थाऐं सदस्य रहेंगे। जनपद स्तरीय समिति उनके जनपदों में आने वाली आर्द्रभूमि का सर्वे करते हुए उसकी वस्तु स्थिति की रिपोर्ट राज्य स्तरीय तकनीकी समिति को प्रस्तुत करेगीए तकनीकी समिति उस रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए अपनी रिपोर्ट राज्य प्राधिकरण को तथा प्राधिकरण अपनी रिपोर्ट सरकार को इंप्लिमंेटेशन हेतु प्रस्तुत करेगी। मा0 मंत्री ने सभी सम्बन्धित अधिकारियों को आर्द्रभूमि के सरंक्षरण और पुनर्जीवन के प्रयासों को गम्भीरता से लेते हुए तथा दूरदर्शिता से अमल में लाने के निर्देश दिये जिससे लोगों की जीविका पर भी कोई अनावश्क दखल न पड़े साथ ही हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण भी सुरक्षित बना रहे। बैठक में संरक्षण के प्रयासों के लिए वन विभाग की एक शाखा में अलग से बजट का प्रावधान रखने पर भी सहमति व्यक्त की गई जिससे समय से और आवश्यकतानुसार आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए बजट उपलब्ध हो सके। राज्य स्तरीय दूसरी कमेटी ग्रिवान्स कमेटी गठित की गई हैए जो आर्द्रभूमि साइट के संरक्षण के प्रयासों के दौरान सामने आने वाले मामलों की सुनवाई करेगी और मामलों का निपटारा तय समय में करते हुए अग्रिम कार्यवाही करेगी। इस अवसर पर सचिव पर्यावरण अरविन्द सिंह ह्यांकीए एसण्पीण्सुबुद्धि सदस्य सचिव उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्डए उत्तराखण्ड जैव विविधा बोर्ड मेंबर सेक्रेटरी एसण्एसण्रसायलीए इसरों से डाॅ प्रकाश चैहन व एसण्पीण् अग्रवालए अपर निदेशक जीण्ओण्आईण् देहरादून एसण्सीण्कटियारए वैज्ञानिक एनण्आईण्एचण् रूड़की डाॅण् वीण्सीण्गोयल सहित मत्स्य विभागए राजस्वए सिंचाई विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
