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उत्तराखंड–केंद्र समन्वय: कनेक्टिविटी, पर्यटन और ऊर्जा परियोजनाओं पर फोकस

नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय मुलाक़ात में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष राज्य की प्रमुख अवसंरचना, पर्यटन और ऊर्जा परियोजनाओं को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। यह बैठक राज्य में तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण, तीर्थाटन और निवेश की संभावनाओं को देखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


🚄 RRTS विस्तार: हरिद्वार–ऋषिकेश को जोड़ने की पहल

मुख्यमंत्री ने दिल्ली–मेरठ RRTS कॉरिडोर को आगे बढ़ाते हुए हरिद्वार और ऋषिकेश तक विस्तार का प्रस्ताव रखा। वर्तमान में यह सेमी-हाई स्पीड रेल प्रणाली दिल्ली–मेरठ के बीच संचालित है।

नीतिगत महत्व:

  • हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे प्रमुख तीर्थ एवं पर्यटन स्थलों तक तेज़ और पर्यावरण-अनुकूल कनेक्टिविटी
  • दिल्ली-एनसीआर से आने वाले यात्रियों के लिए यात्रा समय में कमी
  • सड़क ट्रैफिक और प्रदूषण में संभावित कमी
  • क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और आतिथ्य क्षेत्र को बढ़ावा

🛣️ प्रस्तावित उद्घाटन और शिलान्यास

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को राज्य में प्रस्तावित परियोजनाओं के उद्घाटन/शिलान्यास के लिए आमंत्रित किया:

  • दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे
  • टिहरी पंप्ड स्टोरेज प्लांट
  • पंतनगर हवाई अड्डा का विस्तार
  • बनबसा लैंड पोर्ट

ये परियोजनाएं उत्तराखंड को लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यटन के लिहाज़ से मज़बूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही हैं।


💍 ‘ग्लोबल वेडिंग डेस्टिनेशन’ रणनीति

धामी ने राज्य को डेस्टिनेशन वेडिंग हब के रूप में विकसित करने की रणनीति भी साझा की। इसके तहत:

  • चोपता, दुग्गलबिट्टा, पटवाडांगर और शारदा कॉरिडोर में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास
  • रामनगर, देहरादून, ऋषिकेश और त्रियुगीनारायण जैसे स्थान पहले से लोकप्रिय
  • एक समर्पित वेडिंग डेस्टिनेशन पॉलिसी पर काम जारी

यह बैठक केंद्र और राज्य के बीच समन्वित विकास मॉडल को दर्शाती है, जिसमें कनेक्टिविटी (RRTS, एक्सप्रेसवे), ऊर्जा (पंप्ड स्टोरेज), और पर्यटन (वेडिंग डेस्टिनेशन) तीनों को एक साथ आगे बढ़ाने की रणनीति स्पष्ट दिखती है।

विशेष रूप से RRTS विस्तार का प्रस्ताव उत्तराखंड के लिए “गेम-चेंजर” साबित हो सकता है, क्योंकि यह न केवल धार्मिक पर्यटन बल्कि निवेश, रियल एस्टेट और सेवा क्षेत्र को भी गति देगा। हालांकि, इसके लिए पर्यावरणीय मंज़ूरी, लागत और भू-आकृतिक चुनौतियां प्रमुख कारक रहेंगी।



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By udaen

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