स्वर्गारोहिणी-I के आरोहण के लिए 12 महिला पर्वतारोहियों का दल, पर्यटन विभाग ने एडवेंचर टूरिज्म से जोड़ी पहल
देहरादून। उत्तराखंड के 36 युवा पर्वतारोही हिमालय की तीन प्रमुख चोटियों के आरोहण के लिए अभियान पर रवाना हो गए हैं। उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद और भारतीय पर्वतारोहण संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इन अभियानों को देहरादून स्थित हिमालयन कल्चर सेंटर से पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
तीनों अभियानों में 12-12 पर्वतारोही शामिल हैं। ये दल भागीरथी-II (6,512 मीटर), पंचाचूली-I (6,355 मीटर) और स्वर्गारोहिणी-I (6,252 मीटर) का आरोहण करेंगे।
तीन चोटियां, तीन दल
भागीरथी-II अभियान का नेतृत्व दशरथ सिंह रावत कर रहे हैं, जबकि पंचाचूली-I दल की कमान विजय सिंह रौतेला के हाथों में है। स्वर्गारोहिणी-I अभियान का नेतृत्व अनुभवी पर्वतारोही लता बिष्ट कर रही हैं।
स्वर्गारोहिणी-I अभियान इस पहल का विशेष आकर्षण है। इस दल में सभी 12 सदस्य महिला पर्वतारोही हैं। इनमें नैनीताल, पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी, देहरादून, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और टिहरी जिलों की पर्वतारोही शामिल हैं।
युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर जोर
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि पर्वतारोहण केवल शिखर तक पहुंचने का अभियान नहीं, बल्कि अनुशासन, धैर्य और नेतृत्व की परीक्षा भी है। उन्होंने महिला पर्वतारोहियों के दल को उत्तराखंड की बेटियों के साहस और क्षमता का उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के युवा हिमालय को केवल देखने वाले पर्यटक न रहें, बल्कि प्रशिक्षित पर्वतारोही, गाइड और एडवेंचर प्रोफेशनल के रूप में आगे आएं, ताकि पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के नए अवसर विकसित हो सकें।
100 ट्रेकिंग रूट की GPS मैपिंग
पर्यटन विभाग के अनुसार, राज्य में एडवेंचर टूरिज्म को व्यवस्थित रूप से विकसित करने के लिए 100 ट्रेकिंग रूट की GPS मैपिंग भी की जा रही है। इनमें गढ़वाल और कुमाऊं के 50-50 ट्रेकिंग रूट शामिल हैं।
मैपिंग के आधार पर डिजिटल ट्रेकिंग डेटा तैयार किया जाएगा। इसके साथ मोबाइल ट्रेकिंग नेविगेशन ऐप और ‘द ट्रेक्स ऑफ उत्तराखंड’ नाम से कॉफी टेबल बुक तैयार करने की योजना है।
पर्यटन सचिव एवं उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल ने कहा कि GPS मैपिंग से ट्रेकिंग मार्गों को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने अभियानों में ‘Safety First’ और ‘Leave No Trace’ के सिद्धांतों के पालन पर जोर दिया।
आने वाले महीनों में कई एडवेंचर आयोजन
पर्यटन विभाग के अनुसार, राज्य में आने वाले महीनों में कई बड़े साहसिक पर्यटन आयोजन प्रस्तावित हैं। इनमें 24 से 26 अक्टूबर तक आदि कैलाश परिक्रमा 2.0, 19 से 21 नवंबर तक हिमालयन कार रैली और 20 से 26 नवंबर तक अल्टीमेट उत्तराखंड MTB चैलेंज शामिल हैं।
MTB चैलेंज का प्रस्तावित मार्ग मुक्तेश्वर से मसूरी तक लगभग 700 किलोमीटर का होगा।
इन पहलों के माध्यम से उत्तराखंड में पर्यटन को धार्मिक और पारंपरिक पर्यटन से आगे बढ़ाते हुए पर्वतारोहण, ट्रेकिंग, माउंटेन बाइकिंग और अन्य साहसिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
हिमालय और स्थानीय अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन जरूरी
एडवेंचर टूरिज्म के विस्तार के साथ हिमालयी पर्यावरण की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण होगी। बढ़ती गतिविधियों के बीच ट्रेकिंग कचरा, जैव विविधता, संवेदनशील बुग्यालों और पर्वतीय पारिस्थितिकी पर दबाव को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट पर्यावरणीय मानकों और प्रभावी निगरानी की आवश्यकता होगी।
इन अभियानों से यदि स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण, रोजगार, गाइडिंग, पोर्टर सेवाओं, होमस्टे और अन्य स्थानीय उद्यमों से जोड़ा जाता है, तो पर्वतारोहण और एडवेंचर टूरिज्म उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय आजीविका का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
