कोटद्वार का भविष्य केवल नौकरीपेशा और सेवानिवृत्त लोगों के अनुभव के भरोसे नहीं चल सकता। शहर, जिला, प्रदेश और देश का भविष्य उस पीढ़ी के हाथों में है, जो आज युवा है और कल व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेगी।
इसलिए कोटद्वार के युवाओं को केवल रोजगार की तलाश करने वाला वर्ग नहीं, बल्कि राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक भागीदारी का सक्रिय नागरिक बनना होगा।
लोकतंत्र केवल चुनाव में वोट देने का नाम नहीं है। संविधान ने नागरिकों को जो अधिकार दिए हैं, उनके साथ जिम्मेदारियां भी जुड़ी हैं। युवाओं को यह समझना होगा कि समानता, स्वतंत्रता, शिक्षा, रोजगार, अभिव्यक्ति, सामाजिक न्याय और स्थानीय विकास जैसे सवाल उनके अपने जीवन से जुड़े हुए हैं।
आज जरूरत है कि कोटद्वार का युवा अपने शहर की समस्याओं पर सवाल पूछे—रोजगार कहाँ हैं? पलायन क्यों जारी है? स्थानीय संसाधनों से स्थानीय अर्थव्यवस्था क्यों नहीं बन रही? शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति क्या है? नगर और ग्रामीण क्षेत्रों की योजनाओं का लाभ वास्तव में किसे मिल रहा है?
राजनीति से दूरी बनाना समाधान नहीं है। राजनीति को समझना, जनप्रतिनिधियों से सवाल करना, स्थानीय संस्थाओं में भागीदारी करना और संविधानसम्मत तरीके से अपनी बात रखना लोकतंत्र को मजबूत करने की प्रक्रिया है।
नौकरीपेशा और सेवानिवृत्त नागरिकों का अनुभव निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल अनुभव से भविष्य नहीं बनाया जा सकता। भविष्य के लिए ऊर्जा, नई सोच, तकनीक, उद्यमिता और युवाओं की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है।
कोटद्वार को ऐसे युवाओं की जरूरत है जो नौकरी मांगने के साथ रोजगार पैदा करने, राजनीति में केवल समर्थक बनने के बजाय नीति पर सवाल करने, और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देने के बजाय जमीनी नागरिक भागीदारी करने के लिए आगे आएं।
युवा केवल भविष्य नहीं हैं—वे वर्तमान के भी नागरिक हैं।
इसलिए कोटद्वार में एक ऐसी युवा नागरिक पहल की जरूरत है जो संविधान, लोकतंत्र, रोजगार, उद्यमिता, पर्यावरण, शिक्षा और स्थानीय विकास को एक साथ लेकर चले।
क्योंकि अंततः शहर की व्यवस्था किसी एक पीढ़ी की संपत्ति नहीं है। आज के फैसलों का सबसे बड़ा असर आने वाली पीढ़ी पर पड़ेगा—और उस पीढ़ी की आवाज आज से सुनाई देनी चाहिए।
