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एलिवेटेड रोड निरस्त करने और छूटे आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की मांग को लेकर डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री व मुख्यसचिव को ज्ञापन ।

देहरादून, 10 मार्च 2026: बस्ती बचाओ आन्दोलन एवं उत्तराखण्ड आन्दोलनकारी संयुक्त परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आज एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी देहरादून के माध्यम से मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में दो प्रमुख मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया: पहली, रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड परियोजना को निरस्त किया जाए, और दूसरी, उत्तराखण्ड आन्दोलन के छूटे हुए आंदोलनकारियों का पुनः चिन्हीकरण किया जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह ज्ञापन प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार सदर श्री सेमवाल को सौंपा गया, जिन्होंने मांगों पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
एलिवेटेड रोड के विरोध में मुख्य बिंदु:प्रतिनिधिमंडल ने एलिवेटेड रोड परियोजना को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग करते हुए कहा कि:

  1. बेघरबार का खतरा और वादाखिलाफी: यह परियोजना मुख्यमंत्री के उस वादे के विपरीत है, जिसमें कहा गया था कि किसी भी बस्तीवासी को नहीं हटाया जाएगा। इसके क्रियान्वयन से हजारों परिवारों के बेघर होने का संकट है।
  2. पर्यावरणीय संकट: यह सड़क रिस्पना और बिंदाल नदियों के प्राकृतिक बहाव को अवरुद्ध करेगी, जिससे भविष्य में भीषण बाढ़ और जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। साथ ही, हजारों पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को अपूरणीय क्षति होगी।
  3. विकास की अवधारणा पर सवाल: प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि विकास का अर्थ विस्थापन नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण है। उन्होंने एलिवेटेड रोड के स्थान पर देहरादून की आंतरिक सड़कों और पुलों के पुनर्निर्माण तथा सार्वजनिक यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने की मांग की।
    छूटे आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण हेतु मुख्य मांगें:
    परिषद ने उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के उन सच्चे सेनानियों के पुनः चिन्हीकरण की मांग उठाई, जो विभिन्न कारणों से अब तक लाभ से वंचित हैं:
  4. पुनः चिन्हीकरण का अवसर: राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष में आंदोलनकारियों के सम्मान को देखते हुए, एक विशेष समिति गठित कर जिला स्तर पर सुनवाई का एक और अवसर प्रदान किया जाए।
  5. साक्ष्य में उदारता: कई आंदोलनकारियों के पास लिखित साक्ष्य न होने के कारण, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रमाण-पत्र, सह-आंदोलनकारियों के शपथ-पत्र और तत्कालीन समाचार पत्रों की कतरनों को भी साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जाए।
  6. आश्रितों को लाभ: जिन आंदोलनकारियों का देहांत हो चुका है और जो चिन्हीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके, उनके आश्रितों को तत्काल पेंशन एवं अन्य लाभ प्रदान किए जाएं।
    प्रतिनिधिमंडल ने कहा, “जनता के जनादेश से बनी सरकार का दायित्व है कि वह जनता को बेघर करने की नीति त्यागे और राज्य निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले बुजुर्ग आंदोलनकारियं के प्रति सम्मान प्रकट करे।”

इस अवसर पर अनन्त आकाश सचिव सिपिएम, संयुक्त परिषद के संरक्षक नवनीत गुसांई, सीआईटीयू महामंत्री लेखराज, आयूपी के केन्द्रीय महामंत्री बालेश बबानिया, सीआईटीयू उपाध्यक्ष भगवन्त पयाल, कोषाध्यक्ष रविन्द्र नौडियाल,सचिव अभिषेक भण्डारी, हिमान्शु चौहान, एडवोकेट अनुराधा मन्दोला, नेताजी संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रभात डण्डरियाल, सुनीता चौहान, रामपाल सिह, अमित सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।


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By udaen

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