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संपादकीय

कोटद्वार में मीडिया सेंटर: जमीनी लोकतंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता

उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से जटिल राज्य में संचार व्यवस्था केवल सुविधा नहीं, बल्कि शासन की आधारशिला है। गढ़वाल क्षेत्र के प्रवेश द्वार के रूप में कोटद्वार की रणनीतिक महत्ता निर्विवाद है, लेकिन विडंबना यह है कि यहां अब तक एक समर्पित मीडिया सेंटर की स्थापना नहीं हो सकी है।

यह केवल एक अधोसंरचना की कमी नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर सूचना तंत्र की कमजोरी को भी दर्शाता है। स्थानीय पत्रकार बिना पर्याप्त संसाधनों के कार्य करने को मजबूर हैं, जिससे सूचनाओं की गुणवत्ता, गति और विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

कोटद्वार प्रेस क्लब द्वारा प्रस्तावित मीडिया सेंटर को केवल एक भवन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे पारदर्शी और जवाबदेह शासन की दिशा में एक संस्थागत पहल के रूप में समझना चाहिए।

उत्तराखंड में बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाएं—जैसे बाढ़, भूस्खलन और अतिवृष्टि—यह स्पष्ट करती हैं कि समय पर और प्रमाणिक सूचना का प्रसार कितना महत्वपूर्ण है। ऐसी परिस्थितियों में एक सुसज्जित मीडिया सेंटर प्रशासन, मीडिया और जनता के बीच एक विश्वसनीय सेतु का कार्य कर सकता है।

राष्ट्रीय स्तर पर Press Council of India ने स्वतंत्र और सुदृढ़ मीडिया संरचना की आवश्यकता पर बल दिया है, जबकि Ministry of Information and Broadcasting भी क्षेत्रीय मीडिया तंत्र को मजबूत करने पर जोर देता रहा है।

उत्तराखंड सरकार के लिए यह एक अवसर है कि वह अपनी पारदर्शिता और डिजिटल गवर्नेंस की प्रतिबद्धता को जमीनी स्तर पर साकार करे। कोटद्वार में मीडिया सेंटर की स्थापना न केवल पत्रकारों को सशक्त बनाएगी, बल्कि नागरिकों के सूचना के अधिकार को भी मजबूत करेगी।

अंततः, यह पहल केवल मीडिया के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती और जनविश्वास की पुनर्स्थापना के लिए अत्यंत आवश्यक है।


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By udaen

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