Spread the love

हरिद्वार, 15 मार्च 2026 | विशेष संवाददाता

में रविवार को आयोजित संयुक्त भारतीय क्षत्रिय संसद (उत्तराखंड) की महत्वपूर्ण बैठक में राज्यभर में संगठन के विस्तार का रोडमैप तैयार किया गया। बैठक में सर्वसम्मति से जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर “क्षत्रिय संसद” इकाइयों के गठन का प्रस्ताव पारित किया गया।

बैठक प्रातः 10 बजे से अपरान्ह 2:30 बजे तक चली, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने भाग लिया।


प्रदेश कोर कमेटी का गठन और जिम्मेदारियों का वितरण

बैठक में प्रदेश कोर कमेटी के प्रमुख सदस्यों में डॉ. भरत सिंह (देहरादून), उदयराज सिंह (बाजपुर), रवि नेगी (देहरादून), जी.एस. बिष्ट (रामनगर), धीरज सिंह नेगी, संजीव कुमार सिंह (किच्छा), शेखर सिंह नेगी (सतपुली) और राजेंद्र सिंह रावत (कोटद्वार) शामिल रहे।

संगठन के विस्तार को गति देने के लिए विभिन्न क्षेत्रों की जिम्मेदारियां तय की गईं:

  • हरिद्वार: शेखर राणा
  • कोटद्वार: महेंद्र सिंह रावत
  • नैनीताल मंडल: संजीव सिंह
  • पौड़ी शहर: विक्रम सिंह राणा
  • पौड़ी देहात: बलवंत सिंह पंवार
  • देहरादून: रवि नेगी व सुरेंद्र सिंह तोमर
  • दिल्ली-कोटद्वार मीडिया समन्वय: सुभाष गुसाईं
  • दिल्ली प्रदेश समन्वय: सतीश नेगी

मीडिया प्रबंधन की जिम्मेदारी प्रदेश से लेकर ग्राम स्तर तक जी.एस. बिष्ट को सौंपी गई है।


राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय

बैठक में उमेद सिंह चौहान को राष्ट्रीय कोर्डिनेटर

डॉ गोविन्द सिंह गाड़िया को संस्थापक प्रस्तावक

के रूप में सम्पूर्ण भारत की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके साथ ही डॉ. भरत सिंह बिष्ट को भी राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय की जिम्मेदारी दी गई।


युवा, छात्र और महिला भागीदारी पर फोकस

बैठक में संगठन के तीन प्रमुख प्लेटफार्म—युवा, छात्र और क्षत्राणी (महिला)—को सशक्त बनाने पर लगभग तीन घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई। प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित किया गया कि इन वर्गों की सक्रिय भागीदारी से संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत किया जाएगा।

युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने के संदर्भ में चंबा दरबार से जुड़े भानुप्रताप सिंह के योगदान का भी उल्लेख किया गया।


संगठनात्मक संदेश और आगे की रणनीति

बैठक के अंत में सभाध्यक्ष ने संगठन को गांव-गांव तक विस्तार देने और सामाजिक एकजुटता को मजबूत करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के पश्चात परिसर में समूह फोटोग्राफी आयोजित की गई।


विश्लेषण

यह बैठक उत्तराखंड में सामाजिक संगठनों के बढ़ते नेटवर्किंग प्रयासों को दर्शाती है। जिला से ग्राम स्तर तक संरचना बनाने का निर्णय संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय कर सकता है, हालांकि इसकी प्रभावशीलता संगठनात्मक क्रियान्वयन और स्थानीय भागीदारी पर निर्भर करेगी।


(इनपुट: संगठन की ओर से जारी विवरण)


Spread the love

By udaen

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *