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देहरादून/श्रीनगर:
उत्तराखंड की महिलाओं ने अपने अधिकार और न्याय की मांग को लेकर एक अनोखी और साहसिक पहल शुरू की है। से शुरू हुई लगभग 350 किलोमीटर लंबी पदयात्रा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि उन महिलाओं के आत्मसम्मान और संघर्ष की आवाज़ है जिन्होंने कथित LUCC घोटाले में अपनी जीवनभर की जमा पूंजी गंवा दी।

यह पदयात्रा 8 मार्च, यानी के अवसर पर देश की राष्ट्रपति तक अपनी बात पहुँचाने के उद्देश्य से दिल्ली की ओर बढ़ रही है। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि उन्हें अब न्यायपालिका और शासन-प्रशासन से उम्मीद कम और देश की प्रथम महिला राष्ट्रपति से अधिक आशा है।

इस पदयात्रा का नेतृत्व सामाजिक कार्यकर्ता कर रही हैं। उनके साथ कई पीड़ित महिलाएं भी पैदल चल रही हैं। इन महिलाओं का कहना है कि उन्होंने LUCC में अपनी जीवनभर की बचत निवेश की थी, जो कथित घोटाले में डूब गई। अब वे सरकार से अपनी पूंजी वापस दिलाने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रही हैं।

महिलाओं का कहना है कि यह विडंबना ही है कि जब पूरा देश महिला सशक्तिकरण का जश्न मना रहा होगा, तब उत्तराखंड की ये महिलाएं अपने छाले भरे पैरों के साथ न्याय की गुहार लगाने दिल्ली पहुंचेंगी।

पीड़ितों की प्रमुख मांग है कि लगभग 800 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले की जांच से कराई जाए और जांच की समय-सीमा तय की जाए, ताकि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो सके और निवेशकों की राशि वापस दिलाई जा सके।

सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने भी इस पदयात्रा का समर्थन किया है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना ही लोकतंत्र की असली ताकत है और इन महिलाओं का साहस समाज के लिए प्रेरणा है।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने वाली इन महिलाओं की आवाज सत्ता के गलियारों में सुनी जाएगी या नहीं।

(रिपोर्ट: विशेष संवाददाता)


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By udaen

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