संपादकीय
“जनसंख्या बनाम पहाड़ की वास्तविकता” – उत्तराखंड को चाहिए विशेष मॉडल
परिसीमन केवल आंकड़ों का गणित नहीं, बल्कि लोकतंत्र का संतुलन है।
उत्तराखंड की भौगोलिक संरचना देश के अन्य राज्यों से अलग है।
यदि केवल जनसंख्या को आधार बनाया गया, तो पहाड़ की आवाज़ कमजोर पड़ सकती है।
क्या लोकतंत्र का अर्थ केवल जनसंख्या अनुपात है?
पहाड़ में एक विधायक को कई-कई ब्लॉकों और दुर्गम क्षेत्रों को कवर करना पड़ता है।
मैदान में घनत्व अधिक है, पर भौगोलिक चुनौती कम।
उत्तराखंड को एक “भौगोलिक न्याय मॉडल” की जरूरत हे, जिसमें:
जनसंख्या
भूगोल
सामरिक महत्व
पलायन की समस्या
सभी को समान महत्व दिया जाए।
