2026 के परिसीमन से बदलेगा उत्तराखंड का राजनीतिक भूगोल?
भारत में 2026 के बाद होने वाला नया परिसीमन (Delimitation) उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। 84वें संविधान संशोधन के अनुसार 2026 के बाद पहली जनगणना (संभावित 2031) के आधार पर नई सीटों का निर्धारण होगा।
वर्तमान स्थिति
लोकसभा सीटें – 5
विधानसभा सीटें – 70
राज्य गठन – 2000 (पूर्व में Uttar Pradesh का हिस्सा)
देश – India
क्या बदल सकता है?
🔹 लोकसभा सीटें
जनसंख्या वृद्धि सीमित होने के कारण बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम, लेकिन 5 से 6 सीट होने की चर्चा संभव।
🔹 विधानसभा सीटों का संतुलन
मैदानी क्षेत्र: देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर – जनसंख्या वृद्धि तेज
पहाड़ी क्षेत्र: कम जनसंख्या, विशाल भौगोलिक क्षेत्र
यदि केवल जनसंख्या आधार बनेगा तो मैदानी क्षेत्रों में सीटें बढ़ सकती हैं, जिससे पहाड़ी प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।
सीमावर्ती जिलों का प्रश्न
चमोली, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी जैसे सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिलों में विशेष प्रतिनिधित्व की मांग उठ सकती है।
राष्ट्रीय संदर्भ
पिछला परिसीमन आयोग 2002 में गठित हुआ था जिसकी अध्यक्षता Kuldip Singh ने की थी।
अब 2026 के बाद नई बहस पूरे देश में छिड़ने की संभावना है।
