मौसम केंद्रों की स्थापना
PIB Delhi
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने पिछले एक वर्ष में तीन डॉप्लर मौसम राडार (डीडब्ल्यूआर) स्थापित किए हैं। इनमें से दो सी-बैंड राडार रायपुर और मेंगलूरू में और एक एक्स-बैंड डीडब्ल्यूआर असम के जोरहट में स्थापित किया गया है। इस दौरान देश भर में 200 स्वचालित मौसम केंद्र (एडब्ल्यूएस) भी स्थापित किए गए हैं।
48 डीडब्ल्यूआर के मौजूदा नेटवर्क की पहुंच देश के कुल क्षेत्रफल के लगभग 92 प्रतिशत हिस्से तक है। देश के तटीय, पर्वतीय और द्वीपीय क्षेत्रों में डीडब्ल्यूआर की पहुंच में कुछ कमियां हैं। हिमालयी क्षेत्रों में राडार के जरिए निगरानी को बेहतर बनाने के लिए आईएमडी ने पश्चिमी हिमालय क्षेत्र के लेह, बनिहाल टॉप, जम्मू, श्रीनगर, लैंसडाउन, मुक्तेश्वर, सुरकंडा देवी, जोत, मुरारी देवी और कुफरी में 10 डीडब्ल्यूआर स्थापित किए जो रियल-टाइम में काम कर रहे हैं। पूर्वी हिमालय क्षेत्र में मोहनबाड़ी, चेरापूंजी, अगरतला और जोरहट में राडार काम कर रहे हैं। तटीय राज्यों में 11 राडार पश्चिमी तट में तिरुवनंतपुरम, कोच्चि, मेंगलूरू, मुंबई, वेरावली, मुंबई (जुहू), मुंबई (पनवेल), मुंबई (कल्याण), मुंबई (वसई), गोवा और भुज में स्थापित हैं। पूर्वी तट में आठ राडार चेन्नई, गोपालपुर, पारादीप, करैकल, एनआईओटी (चेन्नई), मछलीपट्टणम, विशाखापट्टणम और श्रीहरिकोटा (इसरो) में काम कर रहे हैं।
राडार स्थापित करने के काम में कोई बड़ी देरी नहीं हुई है। लेकिन कुछ मामलों में तकनीकी तौर पर उपयुक्त स्थान और संबंधित सुविधाओं की अनुपलब्धता की वजह से थोड़ा विलंब हुआ है। वर्तमान में निजी और शैक्षिक नेटवर्कों से उपलब्ध डाटा का उपयोग करने का कोई प्रस्ताव नहीं हैं।
मौजूदा डीडब्ल्यूआर नेटवर्क की पहुंच देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 92 प्रतिशत हिस्से में है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय इसके अलावा, मौसम सूचना नेटवर्क और डाटा प्रणाली (विंड्स) के तहत एडब्ल्यूएस की स्थापना के लिए राज्य सरकारों के साथ सहयोग से काम कर रहा है। विंड्स का उद्देश्य राष्ट्रव्यापी पहुंच के लिए प्रखंड/तहसील स्तर पर एडब्ल्यूएस का नेटवर्क और ग्राम पंचायत स्तर पर स्वचालित वर्षा मापन यंत्र (एआरजी) स्थापित करना है।
