Spread the love

सतही और भूजल संसाधनों की उपलब्धता

PIB Delhi

किसी भी क्षेत्र या देश की औसत वार्षिक जल उपलब्धता काफी हद तक जल-मौसम विज्ञान और भूगर्भीय कारकों पर निर्भर करती है। केंद्रीय जल आयोग द्वारा किए गए “भारत के जल संसाधनों का आकलन – 2024” नामक अध्ययन के अनुसार, देश के नदी बेसिनों में औसत वार्षिक जल संसाधन लगभग 2116 अरब घन मीटर (बीसीएम) आंका गया है। बेसिन-वार जल उपलब्धता अनुलग्नक-I में प्रस्तुत की गई है।

देश के गतिशील भूजल संसाधनों का आकलन 2022 से केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) और राज्य सरकारों द्वारा संयुक्त रूप से प्रतिवर्ष किया जा रहा है। वर्ष  2025 के आकलन के अनुसार, कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण 448.52 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) है और वार्षिक निष्कर्षण योग्य भूजल संसाधन 407.75 बीसीएम है। वर्ष 2025 के लिए पूरे देश का कुल वार्षिक भूजल निष्कर्षण 247.22 बीसीएम अनुमानित किया गया है। भारत के राज्य/संघ राज्य क्षेत्र-वार भूजल संसाधन (2025) अनुलग्नक-II में प्रस्तुत किए गए हैं।

राज्यों ने अंतर्राज्यीय नदियों के जल बंटवारे के लिए विभिन्न समझौते किए हैं। जल बंटवारे से संबंधित किसी भी मामले को अंतरराज्यीय नदी जल विवाद (आईएसआरडब्ल्यूडी) अधिनियम के तहत केंद्र सरकार को नदी जल विवाद न्यायाधिकरण द्वारा निपटान हेतु भेजा जाता है। अब तक, इस प्रकार के 09 न्यायाधिकरण गठित किए जा चुके हैं, जिनमें से 05 न्यायाधिकरण द्वारा उनकी रिपोर्ट प्रस्तुत की जा चुकी है।

‘जल’ राज्य का विषय होने के कारण, जल संसाधनों के संवर्धन, संरक्षण और कुशल प्रबंधन के लिए मुख्य रूप से संबंधित राज्य सरकारों कदम उठाए जाते हैं। राज्य सरकारों के प्रयासों के पूरक के रूप में, केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य सरकारों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करके उनके प्रयासों को संपूरित करती है।

भारत सरकार ने वर्ष 1980 में, जल भंडार उपलब्ध कराने और अधिशेष जल को जल की कमी वाले क्षेत्रों में स्थानांतरित करने हेतु जल संसाधन विकास हेतु राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (एनपीपी) के अंतर्गत नदियों को आपस में जोड़ने संबंधी (आईएलआर) कार्यक्रम की शुरुआत की थी।

एनपीपी के अंतर्गत 30 नदियों को जोड़ने संबंधी (आईएलआर) परियोजनाओं की पहचान की गई है। यह लिंक परियोजनाएं न्यायिक रूप से योजनाबद्ध और डिजाइन की जाती हैं जिससे अतिरिक्त जल वाले बेसिनों से जल की कमी वाले बेसिनों में जल का स्थानांतरण किया जा सके और साथ ही समुद्र में अनुपयुक्त जल के प्रवाह को कम किया जा सके ताकि नदी जल संरक्षण में सहायता मिल सके। एनपीपी के अंतर्गत, राजस्थान से संबंधित तीन परियोजनाएं हैं, जिनमें यमुना-राजस्थान लिंक परियोजना, राजस्थान-साबरमती लिंक परियोजना और संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना (पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना के साथ एकीकृत) शामिल राजस्थान को पेयजल और सिंचाई के क्षेत्र को लाभान्वित करती है।

5 दिसंबर 2024 को समझौता ज्ञापन (एमओए) पर राजस्थान और मध्य प्रदेश राज्यों तथा भारत सरकार के बीच संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल (एमपीकेसी) लिंक परियोजना के कार्यान्वयन के संबंध में हस्ताक्षर किए गए। समझौते के अनुसार, राजस्थान राज्य एमपीकेसी लिंक परियोजना से 3309.83 एमसीएम जल (जिसमें 1744.16 एमसीएम पेयजल शामिल है) का उपयोग करेगा।

राजस्थान राज्य की तीन प्राथमिक परियोजनाएं, नामतः (i) गंग नहर आधुनिकीकरण परियोजना, (ii) नर्मदा नहर परियोजना और (iii) परवन बहुउद्देशीय परियोजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (पीएमकेएसवाई-एआईबीपी) में शामिल हैं। इन परियोजनाओं का ब्यौरा निम्नानुसार है:

क्र.सं.परियोजना का नामलाभान्वित राज्यजारी किया गया सीए (रूपए करोड़ में)टिपण्णी
2016-2025संचयी
1गंग नहर परियोजना का आधुनिकीकरणश्री गंगानगर30.749248.487पूरा किया गया
2नर्मदा नहर परियोजनाजालोर एवं बाडमेर427.821511.871पूरा किया गया
3परवन बहुउद्देशीय परियोजनाझालावाड़, बारां, कोटा475.909475.909वित्त वर्ष 2021-22 में पीएमकेएसवाई-एआईबीपी के अंतर्गत शामिल परियोजना

इसके अलावा, राजस्थान के विभिन्न जिलों में पीएमकेएसवाई के घटक हर खेत को पानी (एचकेकेपी) घटक के तहत 189 जल निकायों की मरम्मत, नवीकरण और पुनरुद्धार (आरआरआर) को शामिल किया गया है और मार्च 2025 तक 22105.74 हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता की बहाली के साथ 94 जल निकायों का पुनरुद्धार किया गया है और मार्च 2025 तक 117.944 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की गई है। लाभान्वित होने वाले जिले अजमेर, बांसवाड़ा, बारां, भरतपुर, भीलवाड़ा, बूंदी, चित्तौड़गढ़, दौसा, धौलपुर, डूंगरपुर, जयपुर, जालौर, झालावाड़, जोधपुर, करोली, कोटा, पाली, प्रतापगढ़, सवाईमाधोपुर, सीकर, सिरोही, टोंक और उदयपुर हैं।

राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (एनआरसीपी), जल शक्ति मंत्रालय के अधीन एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है जो विभिन्न नदियों (गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों को छोड़कर) के चिन्हित क्षेत्रों में प्रदूषण कम करने हेतु राज्य सरकारों को सहायता, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच लागत साझाकरण के आधार पर प्रदान की जाती है। एनआरसीपी के तहत, राजस्थान में लूणी नदी की सहायक नदी जोजारी नदी के प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से राजस्थान के जोधपुर में 40 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) क्षमता वाले सीवेज उपचार संयंत्र स्थापित करने की परियोजना को कुल 172.60 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृति दी गई है।

वर्ष 2019 में, जल शक्ति मंत्रालय ने 256 जल-संकटग्रस्त जिलों में समयबद्ध, मिशन-आधारित जल संरक्षण अभियान के रूप में जल शक्ति अभियान (जेएसए) की शुरुआत की। “कैच द रेन, वेअर इट फाल्स, वेन इट फाल्स” टैगलाइन के साथ वर्ष 2021 में, जल शक्ति अभियान: कैच द रेन (जेएसए: सीटीआर) का पूरे भारत में विस्तार किया गया जिसमें राजस्थान सहित भारत के सभी जिलों, ब्लॉकों और नगर पालिकाओं को शामिल किया गया। जेएसए: सीटीआर के छठे संस्करण 22 मार्च 2025 को “जल संचय, जन भागीदारी: जन जागरूकता की ओर” विषय के साथ शुरुआत की गई। जेएसए: सीटीआर के तहत, राजस्थान में कुल 1,01,687 जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण और 9,156 पारंपरिक जल निकायों का नवीकरण पूरा हो चुका है (2 फरवरी, 2026 तक की स्थिति के अनुसार)।

6 सितंबर 2024 को जेएसए: सीटीआर को और मजबूत करने के लिए “जल संचय जन भागीदारी” (जेएसजेबी) पहल शुरू की गई जिसका उद्देश्य कम लागत में और अधिकतम क्षमता के साथ वर्षा जल संचयन संरचनाओं के निर्माण के लिए सामुदायिक कार्रवाई और एकत्रीकरण में गति लाना है। इसे राजस्थान सहित पूरे भारत में जल संचय-जन भागीदारी पहल के रूप में लागू किया गया है जिसका मुख्य उद्देश्य समाज और सरकार के समग्र दृष्टिकोण का पालन करते हुए सामूहिक प्रयासों के माध्यम से पानी की हर बूंद का संरक्षण सुनिश्चित करना है। दिनांक 2 फरवरी 2026 तक की स्थिति के अनुसारराजस्थान में जेएसजेबी 1.0 और जेएसजेबी 2.0 के तहत कुल 4,15,711 काम पूरे हो चुके हैं।

यह सूचना जल शक्ति राज्यमंत्री श्री राज भूषण चौधरी द्वारा लोकसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में प्रदान की गई है।


Spread the love

By udaen

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *