लोकसंस्कृति और परंपराओं को संजोने वाले ‘धरोहर-2’ मेले ने शुक्रवार को सातवें दिन में भव्य रूप से प्रवेश किया। देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित इस मेले का मुख्य आकर्षण सांस्कृतिक संध्या रही, जिसमें प्रसिद्ध लोकगायक जोत सिंह कृषाली ने अपने मधुर लोकगीतों से समां बाँध दिया। उनकी गायकी ने श्रोताओं को लोक संस्कृति की गहराइयों से जोड़ते हुए भावविभोर कर दिया।
सांस्कृतिक प्रस्तुति में सहयोगी कलाकारों ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। सुरेन्द्र सिंह (ढोलक), संजय नौटियाल (तबला), प्रदीप असवाल (हुड़का), विपिन राणा (अन्तोपेड) और सौरभ उपाध्याय जैसे कलाकारों ने अपने वाद्ययंत्रों से लोकसंगीत की मिठास को और भी गहरा कर दिया।
इस अवसर पर मुख्य मेला आयोजक सुनील रावत ने कहा कि “धरोहर-2” मेला केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि स्थानीय और बाहरी उद्यमियों को एक साझा मंच देने की पहल है। उन्होंने बताया कि मेले में भाग लेने वाले उद्यमियों को अपने उत्पादों को सीधे ग्राहकों के सामने प्रदर्शित करने का अवसर मिला है, जिससे उद्यमी और उपभोक्ता के बीच सीधा संवाद स्थापित हो सके।
मेले में बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की और पारंपरिक उत्पादों के साथ-साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया। आयोजन स्थल पर स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्त्र, पहाड़ी उत्पाद, जैविक सामग्री और अन्य विविध प्रकार की स्टॉलें दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
‘धरोहर-2’ का यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का प्रयास है, बल्कि यह ग्रामीण और शहरी उद्योगों को एकजुट करने का भी माध्यम बनता जा रहा है।
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