कोटद्वार, 15 मई: माय चॉइस रेस्टोरेंट, लाल बत्ती चौराहा, कोटद्वार में आज गढ़वाली फीचर फिल्म “निखण्या जोग” की कोटद्वार में रिलीज़ के अवसर पर एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस मौके पर फिल्म के लेखक एवं निर्देशक श्री देबू रावत ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए फिल्म की सामाजिक प्रासंगिकता और मूल संदेश पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि यह फिल्म उत्तराखंड के एक ऐसे बेरोज़गार युवा की कहानी है, जो रोज़ी-रोटी की तलाश में गांव से शहर की ओर पलायन करता है। ईमानदारी और कठिन परिश्रम से वह तरक्की की राह पर चलता है, लेकिन अधिक पाने की लालसा और लालच से प्रेरित एक छोटी सी चूक उसे फिर से शून्य पर ला खड़ा करती है। यह कहानी न केवल पहाड़ों से हो रहे पलायन की व्यथा को दर्शाती है, बल्कि युवाओं के सामने मौजूद बेरोज़गारी की चुनौती को भी सामने लाती है। फिल्म का सार है — “लालच बहुत बुरी बला है।”
गायत्री आर्ट्स के बैनर तले निर्मित इस फिल्म की मूल कथा डॉ. एम. आर. सकलानी ने लिखी है। निर्माता आशा सकलानी हैं, जबकि पटकथा, संवाद और निर्देशन देबू रावत का है। श्री रावत इससे पूर्व कन्यादान, थोकदार, जय मां धारी देवी और शहीद जैसी सफल फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं।
मुख्य भूमिका में मोहित घिल्डियाल हैं, उनके साथ प्राची पंवार (गांव की नायिका) और मानसी शर्मा (शहर की नायिका) ने अभिनय किया है। अन्य प्रमुख कलाकारों में रवि ममंगाई, अजय सिंह बिष्ट, विनीता नेगी, सुषमा व्यास, पुरुषोत्तम जेठूरी, पूनम नैथानी और अंशिका शामिल हैं।
फिल्म की शूटिंग टिहरी गढ़वाल के सकलाना पट्टी स्थित उनियाल गांव में की गई है। साथ ही, कहानी की मांग पर इसकी कुछ शूटिंग दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में भी की गई, जो इसे उत्तराखंड की पहली ऐसी गढ़वाली फिल्म बनाती है।
गीतकार सत्येंद्र फरिंडिया द्वारा लिखे गए गीतों को सुरों से सजाया है पद्मश्री प्रीतम भारतवान, अमित खरे और प्रतीक्षा बमराणा ने।
इस अवसर पर सीनियर एडिटर दिनेश पाल गुसाईं, प्रसिद्ध गीतकार रमेश डंडरियाल, संगीत निर्देशक संजय रावत, चंद्रजीत बिष्ट, चंद्रेश लखेरा और रमेश डोभाल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
फिल्म ने इससे पूर्व देहरादून और दिल्ली में सफल प्रदर्शन किया है और अब कोटद्वार में भी दर्शकों से सराहना की उम्मीद है।
