सरकार ने देश के हर जिले में कम से कम एक आदर्श ग्राम पंचायत स्थापित करने के मकसद से आदर्श महिला-हितैषी ग्राम पंचायत पहल शुरू की
भारत सरकार ने समाज के सभी वर्गों की महिलाओं के समग्र सशक्तिकरण के लिए जीवन-चक्र के अबाध रुप के आधार पर मुद्दों को संबोधित करने के लिए “संपूर्ण सरकार” और “संपूर्ण समाज” दृष्टिकोण अपनाया है, और इसमें महिलाओं का राजनीतिक सशक्तिकरण भी शामिल है। विभिन्न नीतियों के ज़रिए, भारत सरकार स्थानीय शासन और राजनीतिक नेतृत्व की भूमिकाओं में महिलाओं की अधिक भागीदारी को बढ़ावा दे रही है।
2023 में, भारत की संसद ने संविधान (एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम, 2023, “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” पारित किया, जो संघीय ढांचे के सभी स्तरों पर सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के समान प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने की राष्ट्रीय यात्रा में, एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह ऐतिहासिक कानून संसद के निचले सदन, लोकसभा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधानसभा सहित सभी संघीय राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सभी सीटों में से एक तिहाई सीटें आरक्षित करता है, और इस तरह सार्वजनिक निर्णय लेने के उच्चतम स्तरों पर राजनीति में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को संस्थागत बनाता है।
यह हालिया उपलब्धि, 73वें और 74वें संवैधानिक संशोधन (1992) के ज़रिए स्थानीय शासन के ग्रामीण और शहरी निकायों, यानी पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) और नगर निकायों में एक तिहाई (33 प्रतिशत) सीटें आरक्षित करके, ज़मीनी स्तर पर महिला नेतृत्व की सकारात्मक कार्रवाई के तीन दशकों से अधिक समय की नींव पर हासिल हुई है। विकेन्द्रीकृत संघीय ढांचे को ध्यान में रखते हुए, दो तिहाई से अधिक राज्यों (21 राज्य / और पीआरआई के साथ 2 केंद्र शासित प्रदेश) ने अपने पंचायती राज संस्थानों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण का प्रावधान किया है। नतीजतन, आज स्थानीय सरकारों में करीब 31 लाख निर्वाचित प्रतिनिधियों में से लगभग आधी (46 प्रतिशत), जिसमें 14.5 लाख शामिल हैं, महिलाएं हैं। महिलाओं के प्रतिनिधित्व का ये एक ऐसा पैमाना है, जो दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलता है।
सरकार ने देशभर में पंचायती राज संस्थाओं की महिला निर्वाचित प्रतिनिधियों को सशक्त बनाने के मकसद से एक व्यापक और लक्षित क्षमता निर्माण पहल “सशक्त पंचायत-नेत्री अभियान” शुरू किया है। यह उनकी नेतृत्व क्षमता को तेज करने, उनकी निर्णय लेने की क्षमताओं को बढ़ाने और जमीनी स्तर पर शासन में उनकी भूमिका को मजबूत करने पर केंद्रित है। सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं की महिला निर्वाचित प्रतिनिधियों की क्षमता निर्माण के लिए खास तौर पर डिजाइन किए गए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए हैं। कार्यरत और चुनाव लड़ने वाली महिला नेताओं के सामने आने वाली जमीनी चुनौतियों को पहचानते हुए, पंचायत निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए एक व्यापक “लिंग आधारित हिंसा और हानिकारक प्रथाओं को संबोधित करने वाले कानून पर प्राइमर” भी तैयार किया गया है।
हाल ही में, सरकार ने आदर्श महिला-हितैषी ग्राम पंचायत पहल की शुरुआत की है, जिसका मकसद देश के हर जिले में कम से कम एक आदर्श ग्राम पंचायत स्थापित करना है, जो महिलाओं और लड़कियों दोनों के लिए अनुकूल हो और जिससे लैंगिक समानता और सतत् ग्रामीण विकास के प्रति प्रतिबद्धता को बल मिले।
सरकार का लक्ष्य युवा महिलाओं सहित 01 लाख युवाओं को बिना किसी राजनीतिक संबद्धता के राजनीति में शामिल करना है और उन्हें विकसित भारत के लिए अपने विचारों को हकीकत में बदलने के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करना है।
इसके अलावा, भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा महिलाओं के समग्र शैक्षिक, आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं लागू की जा रही हैं। सरकार गरीबों और हाशिए पर रहने वाले लोगों के लिए ज़रुरी सेवाओं के ज़रिए एक संतुलित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रही है, जिनमें किफायती आवास, संपत्ति से जुड़े महिलाओं के स्वामित्व को प्रोत्साहित करना, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज, औपचारिक ऋण, बीमा और बैंकिंग सेवाओं से जुड़ाव, साथ ही गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को प्रसव के बाद आराम करने और ठीक होने के लिए वित्तीय सहायता, बच्चों और माताओं के पोषण और कल्याण पर नज़र रखना आदि शामिल हैं।
स्वयं सहायता समूहों को बदलाव का माध्यम मानते हुए, आज 10 करोड़ महिलाएं देश के ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक बदलाव ला रही हैं और जमीनी स्तर पर बेहतर नेतृत्व कर रही हैं।
यह जानकारी महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने आज आज राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।
