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भारत के लोकपाल में 76वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ मनाया गया।श्री अभिषेक भगोतिया ने इस अवसर पर भारत के लोकपाल के अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति श्री ए.एम. खानविलकर और सदस्यों का स्वागत किया।अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री ए.एम. खानविलकर ने तिरंगा फहराया जिसके बाद राष्ट्रगान हुआ।अपने भाषण में भारत के लोकपाल के अध्यक्ष ने कहा कि तिरंगा स्वतंत्रता, न्याय और अटूट दृढ़ता के प्रतीक के रूप में ऊंचा और शक्तिशाली है। यह एक साझा नियति में एक अरब आशाओं को बांधता है। एक नियति, जो हमारे संविधान द्वारा शासित और निर्देशित है जिसे ज्ञान, दूरदर्शिता और एक न्यायपूर्ण और समावेशी राष्ट्र के लिए प्रेरणा के साथ तैयार किया गया है।उन्होंने आगे कहा कि यह उत्सव हमारी सामूहिक आकांक्षाओं का प्रतीक है और लोकतंत्र, समानता और न्याय में हमारे अटूट विश्वास का प्रमाण है। प्रत्येक भारतीय के लिए, यह दिन हमें यह याद दिलाने का दिन है कि हम इस महान गणतंत्र को स्वर्णिम भारत बनाने में कैसे योगदान दे सकते हैं और इसकी विरासत और विकास को उजागर कर सकते हैं।उन्होंने आगे कहा कि इस महत्वपूर्ण दिन पर, सभी को खुद को याद दिलाना चाहिए कि हमारा गणतंत्र तब सबसे मजबूत होता है जब इसके नागरिक ईमानदारी, जिम्मेदारी और साहस के साथ काम करते हैं। भ्रष्टाचार, किसी भी रूप में, केवल कानून के साथ विश्वासघात नहीं है, बल्कि विश्वास के साथ विश्वासघात है, वह विश्वास जो हमें एक राष्ट्र के रूप में बांधता है। हमें यह ध्यान में रखना चाहिए कि भारत का लोकपाल केवल एक संस्था नहीं है, यह निष्पक्षता और पारदर्शिता को बनाए रखने का वादा है। उन्होंने सभी से इस मिशन में हाथ मिलाने का आग्रह किया।अंत में, उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे हम नई चुनौतियों और अवसरों की ओर बढ़ रहे हैं, हम एक ऐसे भारत के निर्माण के अपने संकल्प की पुनः पुष्टि करते हैं जो लोकतंत्र और अखंडता का प्रतीक बने।अध्यक्ष ने कहा, “यह गणतंत्र दिवस हममें उद्देश्य, एकता और आशा की नई भावना जगाए।”


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By udaen

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