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अन्नपूर्णा देवी ने कहा, ” अनोखी चुनौतियों का सामना करने वाले दिव्यांग बच्चों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता”

अन्नपूर्णा देवी ने कहा, “एक साथ मिलकर काम करके, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि हर बच्चा, चाहे उसकी परिस्थितियाँ कैसी भी हों, आगे बढ़ सकता है और अपनी पूरी क्षमता का एहसास कर सकता है।”

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने आज सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की ज्यूवेनाइल जस्टिस कमेटी और यूनिसेफ के तत्वावधान में आयोजित 9वें परामर्श सत्र में मुख्य संबोधन दिया। यह कार्यक्रम सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, मथुरा रोड नई दिल्ली, में आयोजित किया गया।

इस परामर्श सत्र का मुख्य विषय दिव्यांगता के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करना था, जिसमें विशेष रूप से कानून के साथ संघर्षरत बच्चों (सीआसीएल) और देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों (सीएनसीपी) पर ध्यान केंद्रित किया गया। परामर्श का उद्देश्य हितधारकों के बीच संवाद को बढ़ावा देना और बच्चों, खासकर दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई करने लायक अंतर्दृष्टि पैदा करना था।

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कार्यक्रम का शुभारंभ सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की ज्यूवेनाइल जस्टिस कमेटी की अध्यक्ष माननीय न्यायाधीश बी.वी. नागरत्ना,  के संबोधन से हुआ। माननीय न्यायाधीश नागरत्ना ने दिव्यांग बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला और इस महत्वपूर्ण कार्य में सभी हितधारकों की सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया।

उद्घाटन भाषण भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश, डॉ. न्यायाधीश धनंजय वाई. चंद्रचूड़ ने दिया, जिसमें एक समावेशी समाज बनाने के महत्व पर बल दिया गया, जहां हर बच्चा, अपनी क्षमताओं के बावजूद, अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने के लिए सशक्त बन सके।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने अपने विशेष संबोधन में दिव्यांग बच्चों के सामने आने वाली बहुआयामी चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “बाल सुरक्षा केवल एक अवधारणा नहीं है बल्कि यह हमारा साझा कर्तव्य है, खासकर जब दिव्यांग बच्चों की बात आती है। हमारी आबादी का लगभग एक तिहाई हिस्सा बच्चों का है, आज की बैठक भारत की उनके कल्याण और सुरक्षा के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत सरकार हर बच्चे के लिए एक सुरक्षित और पोषित वातावरण बनाने के लिए समर्पित है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा बाल सुरक्षा के लिए आवंटित धनराशि में वृद्धि इस प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। दिव्यांग बच्चे, जो अनोखी चुनौतियों का सामना करते हैं, वह विशेष ध्यान देने के पात्र हैं। एक साथ मिलकर काम करके, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि हर बच्चा, चाहे उसकी परिस्थितियाँ कैसी भी हों, आगे बढ़ सके और अपनी पूरी क्षमता के बारे में जान सके।”

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इस कार्यक्रम में, यूनिसेफ की भारत में कंट्री रिप्रेजेंटेटिव सुश्री सिंथिया मैक्काफ़्री ने अपने परिचयात्मक वक्तव्य में बच्चों, खासकर सबसे कमजोर बच्चों के अधिकारों और कल्याण को बढ़ावा देने के लिए यूनिसेफ की प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम के दौरान, एक वृत्तचित्र फिल्म दिखाई गई, जिसमें बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा में आने वाली चुनौतियों और सफलताओं को दर्शाया गया था, जिसके बाद एक गहन चर्चा हुई।

इस परामर्श का एक मुख्य आकर्षण “दिव्यांग व्यक्तियों से संबंधित हैंडबुक” का विमोचन था, जो दिव्यांग व्यक्तियों की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए प्रभावी उपायों को लागू करने में हितधारकों का मार्गदर्शन करने के लिए डिज़ाइन किया गया एक महत्वपूर्ण संसाधन है।


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By udaen

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