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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय

किशोर लड़कियों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की हड्डियों तथा मांसपेशियों के स्वास्थ्य में पोषण की भूमिका पर वेबिनार का आयोजन; और तीसरे राष्ट्रीय पोषण माह उत्सव के एक हिस्से के रूप में बच्चों के आंत्र संक्रमण में स्कूल आधारित रोकथाम तथा प्रबंधन

प्रविष्टि तिथि: 22 SEP 2020 5:26PM by PIB Delhi

भारत सरकार का महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, सितंबर 2020 में मनाए जाने वाले तीसरे पोषण माह के दौरान वेबिनार की एक श्रृंखला का आयोजन कर रहा है। इसके तहत एक वेबिनार 15 सितंबर को किशोर लड़कियों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं की हड्डियों तथा  मांसपेशियों के स्वास्थ्य में पोषण की भूमिका पर आयोजित किया गया था। जबकि वेबिनार की श्रृंखला में अंतिम कार्यक्रम आज “बच्चों के आंत्र संक्रमण में स्कूल आधारित रोकथाम और प्रबंधन” विषय पर आयोजित किया गया था। इस समारोह की अध्यक्षता भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में सचिव श्री राम मोहन मिश्रा ने की।

किशोर लड़कियों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की हड्डियों तथा मांसपेशियों के स्वास्थ्य में पोषण की भूमिका पर आयोजित वेबिनार में अतिथि वक्ता मेजर जनरल (डॉ) रमन कुमार मारवाह ने भारतीय बच्चों, किशोरों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के बीच हड्डियों के बेहतर स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डाला। इस विषय पर आधारित विभिन्न शोध अध्ययनों के आधार पर उन्होंने कहा कि दुनिया भर में सालाना 89 लाख फ्रैक्चर हड्डियों के ख़राब स्वास्थ्य के कारण होते हैं। अपने व्याख्यान के अंत में डॉ. रमन ने सुझाव दिया कि बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की हड्डियों का बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए उन्हें आहार और अपनी दिनचर्या पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा के लिए स्वास्थ्यप्रद भोजन, सूरज की पर्याप्त रोशनी और नियमित व्यायाम करना बेहद आवश्यक है। वेबिनार की दूसरी अतिथि वक्ता राष्ट्रीय पोषण संस्थान, हैदराबाद की डॉ. भारती कुलकर्णी ने गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की हड्डियों के स्वास्थ्य पर बोलते हुए गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान पोषण की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया। अपने शोध के निष्कर्षों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने भोजन में प्रोटीन, कैल्शियम, ज़िंक आदि की पर्याप्त मात्रा और विटामिन डी के सेवन के अलावा, बच्चे के ‘पहले 1000 दिनों’ के दौरान सघन मांसपेशियों और स्वस्थ हड्डियों के लिए पोषण से भरपूर संतुलित आहार की सिफारिश की।

“बच्चों के आंत्र संक्रमण में स्कूल आधारित रोकथाम और प्रबंधन” पर आयोजित वेबिनार के अतिथि वक्ता सीएमसी वेल्लोर के डॉ. गगनदीप कंग ने 5 से 14 वर्ष तक के स्कूली बच्चों में आंतों के संक्रमण की रोकथाम और प्रबंधन को रेखांकित किया तथा ऐसे संक्रमणों के कारण होने वाली मौतों की घटनाओं तथा विकलांगता के बारे में विवरण दिया। उन्होंने कहा कि आंतों का संक्रमण जल जनित, खाद्यजन्य या व्यक्ति से व्यक्ति को हो सकता है। जिसके कारण आंत सम्बन्धी (दस्त और पेचिश आदि), यकृत (हेपेटाइटिस ए और ई), शरीर (टाइफॉइड, पैराटीफॉइड, आदि), या फिर मस्तिष्क (उदाहरण के लिए, सिस्टिसिरोसिस) प्रभावित हो सकता है। रोकथाम के तरीकों में साफ पानी, स्वच्छ भोजन, स्वच्छ वातावरण, अच्छा पोषण, टीका, स्वास्थ्य-शिक्षा को बढ़ावा देना, स्क्रीनिंग (कमियां और संक्रमण) और रेफरल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि स्कूली  स्वास्थ्य सेवाओं को बच्चों की भलाई पर ध्यान देना चाहिए।

सम्बंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और विकास भागीदारों के प्रतिनिधि, पीआरआई सदस्य, आईसीडीएस अधिकारी, राज्य डब्ल्यूसीडी प्रतिनिधि, डोमेन विशेषज्ञ, पोषण विशेषज्ञ, मंत्रालय के अधिकारी और अन्य लोगों ने इस वेबिनार में भाग लिया।


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By udaen

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