पर्यावरण एवं वन, जलवायु परिवर्तन और विज्ञान-तकनीकी मामलों पर बनी संसद की स्थायी समिति के चेयरमैन जयराम रमेश ने कहा, बड़ी परियोजनाओं की मंजूरी देने में यह अधिनियम जन भागीदारी को कदम दर कदम कम करता है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने प्रस्तावित पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए), अधिसूचना, 2020 के मसौदे पर कड़ी आपत्तियां जताई हैं। उन्होंने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को लिखे एक पत्र में कहा, अब वे कंपनियां या उद्योग भी अपनी प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए मंजूरी प्राप्त कर सकेंगे जो इससे पहले पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करते रहे हैं। यह गैरकानूनी है। यह पर्यावरण मंजूरी से पहले जन भागीदारी और आकलन के सिद्धांतों के खिलाफ है।
इसमें पर्यावरणीय प्रभावों के आकलन से भी दूरी बनाई गई है। रमेश ने यह भी आरोप लगाया है कि बड़ी संख्या में पर्यावरण मंजूरी देने से परियोजनाओं के लिए लंबी अवधि के लिए जमीन सुरक्षित की जा सकेगी। उस समय भी जब वहां पर कोई निर्माण नहीं होगा। इससे जमीन पर कब्जा बढ़ेगा, न कि विकास होगा।
कोई शोध भी नहीं किया गया, सहकारी संघवाद के लिए ताबूत
पत्र में जयराम रमेश ने यह भी आरोप लगाया है कि ईआईए अधिसूचना में ये बदलाव ऑडिट (जांच), एसेसमेंट (आकलन) और एनालिसिस (विश्लेषण) के आधार पर नहीं हैं और न ही किसी तरह का शोध ही किया गया। साथ ही इससे केंद्र के पास राज्य पर्यावरणीय प्रभाव आकलन एजेंसियों को नियुक्त करने की पूरी शक्ति मिलेगी। यह सहकारी संघवाद के लिए एक और ताबूत साबित होगी।
जावड़ेकर ने जयराम की आपत्तियों को बताया आधारहीन
वहीं, प्रकाश जावड़ेकर ने ईआईए अधिसूचना मसौदे में प्रस्तावित बदलाव के संबंध में वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश की आपत्तियों को आधारहीन बताया है। जावड़ेकर ने कहा, आपके सभी सुझाव आधारहीन और गलत व्याख्या पर आधारित हैं। ईआईए अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव पर जन सामान्य के सुझाव एवं टिप्पणियों के लिए अभी 15 दिन बाकी हैं। उन्होंने कहा, मैं आपके पत्र का विस्तृत जवाब बाद में दूंगा।
सरकार सभी सुझावों पर विचार करने के बाद अधिनियम को अंतिम रूप देने में लगी है। सरकार के निर्णय हमेशा से संसद और स्थायी समितियों की जांच के लिए खुले हैं। उल्लेखनीय है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने बीते 30 जून को केंद्र सरकार की ईआईए अधिसूचना, 2020 पर जनता द्वारा टिप्पणी भेजने की समयसीमा को बढ़ाकर 11 अगस्त कर दिया था। इससे पहले ये तारीख 30 जून 2020 थी।
