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PIB Delhi

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन नीति (एनपीडीएम) के अनुसार, आपदा प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की होती है। इसमें जमीनी स्तर पर राहत सहायता का वितरण भी शामिल है। राज्य सरकारें प्राकृतिक आपदाओं के बाद, भारत सरकार द्वारा अनुमोदित मदों और मानकों के अनुसार, अपने निपटान हेतु पहले से उपलब्ध राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) तथा अन्य उपलब्ध संसाधनों से राहत उपाय करती हैं। केंद्र सरकार राज्य सरकारों के प्रयासों का पूरक समर्थन करती है और आवश्यक लॉजिस्टिक तथा वित्तीय सहायता प्रदान करती है। गंभीर प्राकृतिक आपदा की स्थिति में, निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (आईएमसीटी) की सिफारिशों के आधार पर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) से अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

यह मंत्रालय देश में किसी भी आपदा के कारण हुई जनहानि और संपत्ति की क्षति से संबंधित आंकड़ों का केंद्रीय स्तर पर संधारण नहीं करता है। हालांकि, पिछले तीन वर्षों अर्थात 2023-24 से 2025-26 के दौरान हिमाचल प्रदेश सहित देश में विभिन्न जल-मौसम संबंधी आपदाओं के कारण राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा रिपोर्ट की गई क्षति का विवरण अनुलग्नक-I के अनुसार है।

इसके अतिरिक्त, पिछले तीन वर्षों अर्थात 2023-24 से 2025-26 के दौरान राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) के अंतर्गत राज्यों को निधियों के राज्यवार आवंटन और जारी की गई राशि का विवरण अनुलग्नक-II के अनुसार है।

केंद्र सरकार ने मौजूदा संस्थागत और नीतिगत ढांचे के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश सहित पर्वतीय राज्यों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को सुदृढ़ करने और लचीलापन बढ़ाने के लिए कई पहलें की हैं; जिनका विवरण नीचे दिया गया है: –

  1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (एनडीएमपी) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) द्वारा जारी दिशानिर्देशों में भूस्खलन, बादल फटना, हिमनदीय झील विस्फोट बाढ़ (जीएलओएफ), वनाग्नि और भूकंप जैसी आपदाएँ शामिल हैं, जिनके प्रति हिमालयी क्षेत्र विशेष रूप से संवेदनशील है।
  2. सरकार ने हिमाचल प्रदेश सहित 15 राज्यों में कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण परियोजना (एनएलआरएमपी) को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य समुदायों और उनकी परिसंपत्तियों की भूस्खलन के प्रति संवेदनशीलता को कम करके मृत्यु दर और आर्थिक नुकसान को घटाना है। इस परियोजना के तहत हिमाचल प्रदेश के लिए 125 करोड़ रुपये का केंद्रीय अंश और 14 करोड़ रुपये का राज्य का अंश स्वीकृत किया गया है।
  3. अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और उत्तराखंड राज्यों के लिए हिम नदीय झील विस्फोट बाढ़ (जीएलओएफ) के जोखिम से निपटने के लिए विभिन्न संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक शमन उपाय अपनाने हेतु राष्ट्रीय हिमनदीय झील विस्फोट बाढ़ जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम (एनजीआरएमपी) को मंजूरी दी गई है।
  4. वनाग्नि जोखिम प्रबंधन के लिए शमन योजना को भी मंजूरी दी गई है, जिसके तहत हिमाचल प्रदेश के लिए 7.34 करोड़ रुपये का केंद्रीय अंश और 82 लाख रुपये का राज्य का अंश स्वीकृत किया गया है।
  5. पंचायती राज संस्थानों में समुदाय- आधारित आपदा जोखिम न्यूनीकरण पहलों को सुदृढ़ करने हेतु राष्ट्रीय परियोजना के अंतर्गत, हिमाचल प्रदेश के लिए कुल 14.84 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, ताकि नीचे से ऊपर की ओर के दृष्टिकोण के माध्यम से पंचायती राज शासन व्यवस्था में आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) की व्यवस्थाओं का एकीकरण किया जा सके।
  6. कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (सीएपी) पर आधारित एक एकीकृत चेतावनी प्रणाली (सचेत) भी शुरु की गई है; इस प्रणाली के तहत भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी), भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई), भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (इनकॉइस), रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान (डीजीआरई) और भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई) द्वारा जारी अलर्टों का एकीकरण करके भू-लक्षित प्रारंभिक चेतावनियाँ प्रसारित की जाती हैं।
  7. इसके अतिरिक्त, यह आपदा मित्र और युवा आपदा मित्र योजना जैसी पहलों के माध्यम से बहु-आपदा प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना, सामुदायिक तैयारी और क्षमता निर्माण को निरंतर सुदृढ़ कर रहा है।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में आज यह जानकारी दी।

कृपया अनुलग्नक देखने के लिए यहाँ क्लिक करें


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By udaen

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