मुनिकीरेती के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में पंचकर्म चिकित्सा का लाभ महज पांच रुपये में उठा सकते हैं।
यहां मात्र एक रुपये में आप ओपीडी परामर्श ले सकते हैं, जबकि पांच रुपये में एक सप्ताह तक पंचकर्म चिकित्सा का लाभ ले सकते है। विदेशी पर्यटक इस विशिष्ट चिकित्सा का जमकर लाभ उठा रहे हैं।
पंचकर्म आयुर्वेद चिकित्सा का प्रमुख शुद्धीकरण उपचार है। पंचकर्म का अर्थ है पांच विशिष्ट चिकित्साओं का मेल। इस प्रक्रिया का प्रयोग शरीर को बीमारियों व कुपोषण के कारण छोड़े गए विषैले पदार्थों से निर्मल करने के लिए होता है। अब उत्तर भारत में भी बड़ी संख्या में लोग पंचकर्म के लिए पहुंच रहे हैं। योग एवं अध्यात्म की अंतरराष्ट्रीय राजधानी कही जाने वाली यह चिकित्सा दक्षिण भारत में खासी प्रचलित थी, ऋषिकेश में पंचकर्म व प्राकृतिक चिकित्सा के कई केंद्र स्थापित हो चुके हैं। निजी चिकित्सा केंद्रों पर जहां पंचकर्म जैसी पद्धति के लिए लोगों को खासा पैसा खर्च करना पड़ता है, वहीं मुनिकीरेती के राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय में पंचकर्म पद्धति मात्र पांच रुपये में उपलब्ध है। इस केंद्र पर बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी पंचकर्म का लाभ लेते देखे जा सकते हैं।चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एनडी सेमवाल ने बताया कि प्रतिदिन पांच से आठ लोग पंचकर्म के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें 90 फीसद लोग विदेशी होते हैं। कुछ विदेशी उपचार कर्ताओ ने बताया कि वह अब पहले के मुकाबले बेहद स्वस्थ्य महसूस कर रहै हैं।
आयुर्वेद में शरीर में होने वाले रोगों के लिए प्रमुख रूप से तीन कारक वात, पित्त व कफ अथवा त्रिदोष हैं। इन तीनों दोषों के जो शरीर में आसमान हो गए हैं को समान रूप में लाने के लिए पंचकर्म किया जाता है पंच कर्म में पांच प्रक्रियाएं प्रयोग में लाई जाती हैं। पंचकर्म से पूर्व, पूर्व कर्म यानी पूर्व शुद्धिकरण उपाय कराया जाता है। इसके पश्चात पंचकर्म की पांच विधियां वमन (उपचारात्मक उल्टी), विरेचन (परिष्करण चिकित्सा), बस्ती (एनिमा), नस्य (नाक की सफाई), रक्त मोक्षण (रक्त बहने देना) आदि शामिल की जाती हैं।
यह मगर माइग्रेन, स्ट्रेस, अङ्क्षनद्रा, साइटिका, जोड़ों का दर्द, पाइल्स, वात रोग, उच्च रक्त चाप, मधुमेह आदि रोगों में यह चिकित्सा बेहद कारगर होती है
