मत्स्य पालन की पहचान बनेगा ल्वाणी गांव
देवाल। पिंडर घाटी का ल्वाणी गांव जल्द ही जिले में मत्स्य पालन की पहचान बनेगा। मत्स्य पालन विभाग ने गांव के लिए एक योजना शुरू की है, जिसके तहत गांव में जर्मन प्रजाति की ट्राउट मछली का उत्पादन किया जाएगा। योजना समय पर धरातल पर उतरी तो गांव के बेरोजगार युवा मत्स्य पालन से आर्थिकी जुटा सकेंगे।
मत्स्य विभाग की ओर से मछली व्यवसाय को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए 40 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। विभाग की ओर से देवाल ब्लाक के ल्वाणी ग्राम पंचायत में देवभूमि मत्स्य पालन सहकारी समिति को मत्स्य पालन के लिए 20 लाख रुपये दिए गए हैं। विभाग ने पहली किस्त 10 लाख रुपये समिति के खाते में डाल दी है। पहले चरण में 10 तालाब बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। इसमें जर्मन प्रजाति की ट्राउट मछली का उत्पादन किया जाएगा। अगर विभाग की यह योजना सफल रही तो इसमें कई नौजवानों को रोजगार मिलेगा। वहीं लोगों को आसानी से कम दाम पर मछली उपलब्ध हो सकेगी। मत्स्य विभाग के गढ़वाल मंडल के उपनिदेशक गणेश चंद्र जोशी ने बताया कि समिति के माध्यम से ल्वाणी में जर्मन प्रजाति की ट्राउट प्रजाति की मछली पैदा की जाएगी। ट्राउट मछली एक समय में 1500 से अधिक अंडे देती है। ट्राउट मछली को चमोली के बैरांगना केंद्र से दिया जाएगा। इसके लिए 20 लाख की स्वीकृति दी गई है। विभाग अनुदान के साथ समिति से जुड़े युवाओं को तकनीकी जानकारी भी दे रहा है।
