प्रति व्यक्ति आय में आगे उत्तराखंड लेकिन पहाड़ी ज़िले विकास को तरसे
पहाड़ की राजनीति करने वाले विधायक ही मानते हैं कि आज भी पहाड़ पिछड़ा हुआ है.
आंकड़ों में उत्तराखंड की प्रति व्यक्ति आय भले ही देश से ज्यादा हो लेकिन पहाड़ आज भी उस विकास को तरस रहा है जिसके लिए अलग राज्य का आंदोलन किया गया था और जिस विचार के साथ उत्तराखंड का गठन हुआ था. हकीकत यह है कि राज्य की प्रतिव्यक्ति आय तो बढ़ रही है लेकिन विकास में पहाड़ पिछड़ रहा है.उत्तराखंड में प्रति व्यक्ति आय यानि एक आदमी की सालाना कमाई 1,90.284 रुपये है जबकि देश की प्रति व्यक्ति आय 1,25,397 है. इसका अर्थ यह हुआ कि आंकड़ों में उत्तराखंड का निवासी देश के बाबकी निवासियों के मुकाबले 64,887 रुपये ज़्यादा कमाता है.
रिपोर्ट के मुताबिक इस आंकड़े में बड़ा योगदान राज्य के 4 मैदानी जिलों का है. कमाल की बात यह है कि राज्य की दोनों प्रमुख पार्टियां बीजेपी और कांग्रेस यह स्वीकार करते हैं कि राज्य बनने के 18 साल में मैदानी ज़िलों में उद्योगों का उत्पादन भी बढ़ा है और आबादी का बोझ भी.पहाड़ी जिलों में रहने वाले लोग प्रति व्यक्ति आय के आंकड़े से खुश तो हो सकते हैं लेकिन पहाड़ की राजनीति करने वाले विधायक ही मानते हैं कि आज भी पहाड़ पिछड़ा हुआ है. केदारनाथ से कांग्रेस के विधायक मनोज रावत कहते हैं कि पहाड़ी नेताओं को भी मैदान ज़्यादा पसंद आता है.
आंकड़ों के खेल में कमाई भी अच्छी लगती है और विकास भी लेकिन हकीकत के धरातल पर ये आंकड़े विरोधाभासी दिखते हैं. पहाड़ी राज्य कहे जाने वाला उत्तराखंड आज भी शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्र में संघर्ष कर रहा है. ऐसे में प्रति व्यक्ति आय के आंकड़े दिल बहलाने का एक अच्छा ख्याल भर लगते हैं.