Spread the love

ऑस्ट्रेलियन मेरिनो भेड़ों से बदलेगी उत्तराखंड में पशुपालन की स्थिति… बढ़ेगी किसानों की कमाई

ऑस्ट्रेलिया से आयातित उच्च गुणवत्ता की भेड़ों को अगले पांच साल तक एक निर्धारित ब्रीडिंग प्लान के तहत प्योर लाइन और क्रॉस ब्रीडिंग कार्यक्रमों में उपयोग में लाया जाएगा.

ऑस्ट्रेलियन मेरिनो भेड़ों से बदलेगी उत्तराखंड में पशुपालन की स्थिति... बढ़ेगी किसानों की कमाई
देहरादून. मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया की मेरिनो भेड़ें उत्तराखंड में पशुपालन के क्षेत्र में क्रान्तिकारी और प्रगतिशील कदम है. इन भेड़ों से जहां उच्च गुणवत्ता की ऊन प्राप्त होगी, वहीं ऊन की मात्रा में भी वृद्धि होगी. इससे किसानों की आर्थिक स्थिति तेज़ी से सुधरेगी. मुख्मयमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में भेड़ों का नस्ल सुधार कार्यक्रम ज़रूरी है और इसी उद्देश्य से ऑस्ट्रेलिया से उच्च गुणवत्ता की 240 मेरिनो भेड़ें आयात कर राजकीय भेड़ प्रजनन प्रक्षेत्र कोपडधार, घनसाली टिहरी में व्यवस्थित की गई हैं.विदेशी ऊन पर निर्भरता कम होगी

गुरूवार को सचिवालय में राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना के अन्तर्गत उत्तराखण्ड में भेड़ों की नस्ल सुधार, ऊन गुणवत्ता और ऊन उत्पादन में वृद्धि के लिए आयातित ऑस्ट्रेलियन मेरिनो भेड़ के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री ने एक प्रेस कॉंफ़्रेंस की. इसमें मुख्यमंत्री ने कहा कि इन भेड़ों से प्राप्त होने वाली ऊन से वूलन मिलों की विदेशी ऊन पर आत्मनिर्भरता कम होगी. उत्तरखण्ड में अच्छी किस्म की ऊन की उत्पादकता में तेजी से वृद्धि होगी.मुख्यमंत्री ने कहा कि सीआईआई के माध्यम से भारत के ऊन उद्योग से जुड़े व्यापारियों से वार्ता के दौरान यह पता चला कि देश में 95 प्रतिशत ऊन का आयात ऑस्ट्रेलियन मेरिनो ऊन का होता है. इसी के बाद इन भेड़ों को मंगाया गया. इन मेरिनो भेड़ों से राज्य के भेड़पालकों को उच्च गुणवत्ता के नर भेड़ें तो उपलब्ध होंगी ही, ऊन की गुणवत्ता और के साथ शरीरिक भार में वृद्धि होगी. इससे भेड़ पालकों को आशातीत लाभ प्राप्त होगा.

हिमाचल, जम्मू-कश्मीर को भी मिलीं 

पशुपालन सचिव आर मीनाक्षी सुन्दरम ने कहा कि भारत सरकार की राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना के तहत तीन पर्वतीय राज्यों उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर में भेड़ों में नस्ल सुधार, ऊन गुणवत्ता और ऊन उत्पादन में सुधार के लिए भेड़ों के आयात को स्वीकृति मिली. उत्तराखण्ड राज्य के लिए 240 मेरिनो भेड़ (40 नर और 200 मादा) के लिए कुल 8.50 करोड़ रुपये (90 प्रतिशत केन्द्र और  10 प्रतिशत राज्य का अंश) की धनराशि उपलब्ध कराई गई.

पशुपालन सचिव ने कहा बताया कि भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार उत्तराखण्ड की भेड़ें राजकीय भेड़ प्रजनन प्रक्षेत्र, कोपड़धार, घनसाली, टिहरी में एक महीने के लिए अलग-थलग रखी रखी जा रही हैं. इस बीच भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद (ICAR) की एक High Security Animal Disease Laboratory, Bhopal और Indian Veterinary Research Institute (IVRI) फिर भेड़ों की जांच करेगी. रोगमुक्त पाए जाने पर ही भेड़ें प्रक्षेत्र पर प्रयोग में लायी जाएंगीं.ब्रीडिंग प्लान 

ऑस्ट्रेलिया से आयातित उच्च गुणवत्ता की भेड़ों को अगले पांच साल तक एक निर्धारित ब्रीडिंग प्लान के तहत प्योर लाइन और क्रॉस ब्रीडिंग कार्यक्रमों में उपयोग में लाया जाएगा. आधुनिक प्रजनन तकनीक  Artificial Insemination  in Sheep  and Embryo Transfer Technology  के प्रयोग से उच्च कोटि के Germplasm को उत्तराखण्ड के भेड़ पालकों को उपलब्ध कराया जाएगा.इस अवसर पर पशुपालन मंत्री रेखा आर्य, विधायक गोपाल सिंह रावत, ऑस्ट्रेलिया में भेड़ पालन के क्षेत्र में कार्य कर रहे मैथ्यू कांडिक्टन, बेन वाट्स, चार्ली कांडिक्टन, एलिसा वाट्स, उत्तराखण्ड भेड़ और ऊन विकास बोर्ड के मुख्य अधिशासी अधिकारी डॉक्टर अविनाश आनंद उपस्थित थे.


Spread the love

By udaen

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *