गुरु गोरखनाथ के आर्शीवाद से मिली थी सिद्धबाबा को सिद्धि

श्री सिद्धबली मंदिर समिति के अध्यक्ष कुंज बिहारी देवरानी के मुताबिक श्री सिद्धबली धाम गुरु गोरखनाथ जी की तपस्थ स्थली रही है। आदिकाल में मंदिर स्थल पर सिद्ध पीढ़ियां थी। 80 के दशक में मंदिर में बाबा की मूर्ति स्थापित हुई। इसके बाद ही मंदिर का सौंदर्यीकरण हुआ। यह भी मान्यता है कि हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने के लिए इसी रास्ते हिमालय गए थे।
जागर में कही जाती है कथा
सिद्धबली मंदिर में जब जागर लगाए जाते हैं तो उसमें इस कथा का विस्तार से वर्णन किया जाता है। इसे सिद्धबाबा के जागर भी कहते हैं। मंदिर में नाथ समुदाय का विशेष महत्व होता है। सिद्धबली के गुरु गोरखनाथ का शिष्य होने के कारण नाथ समुदाय के लोग इस महोत्सव में बड़ी संख्या में शिरकत करते हैं। लैंसडौन विधायक दिलीप रावत श्री सिद्धबली मंदिर के महंत भी हैं। वह बताते हैं कि स्कंद पुराण के अध्याय 119 में इसका वर्णन मिलता है।
2026 तक भंडारों की हो चुकी एडवांस बुकिंग
श्री सिद्धबली धाम कोटद्वार में बाबा की चौखट से कोई भी श्रद्धाुल निराश नहीं लौटता है। सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद यहां पूरी होती है। मनोकामना पूरी होते ही भक्त मंदिर में भंडारा कर हनुमान जी को भोग लगाते हैं। श्रद्धालुओं पर बजरंग बली की नेमत इस कदर बरसती है कि भंडारा आयोजन के लिए भक्तों को सालों साल इंतजार करना पड़ता है। धाम में अगले सात सालों यानि 2026 तक भंडारों की एडवांस बुकिंग चल रही है। भंडारा सुबह नौ बजे से अपराह्न तीन बजे तक चलता है।
