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मोना अग्रवाल, अवनी लेखरा, निशाद कुमार और सिमरन शर्मा सहित भारतीय खिलाड़ियों ने बढ़ाया गौरव; एथलेटिक्स बना पदक अभियान का सबसे मजबूत आधार

आइची-नागोया, जापान | 22 अक्टूबर 2026 | खेल विशेष

जापान के आइची-नागोया में आयोजित पांचवें एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। 21 अक्टूबर को तीसरे दिन की प्रतियोगिताएं समाप्त होने तक भारत ने 14 स्वर्ण, 22 रजत और 26 कांस्य सहित कुल 62 पदक अपने नाम किए थे। इसके साथ भारत पदक तालिका में पांचवें स्थान पर पहुंच गया।

भारत के इस प्रदर्शन में पैरा एथलेटिक्स की सबसे बड़ी भूमिका रही। निशानेबाजी, तीरंदाजी, तैराकी, पावरलिफ्टिंग, जूडो और पैरा टेबल टेनिस में भी भारतीय खिलाड़ियों ने पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। प्रतियोगिताएं 24 अक्टूबर तक जारी हैं, इसलिए पदकों की संख्या में आगे बदलाव संभव है।

भारत की पदक तालिका

पदकसंख्या
🥇 स्वर्ण14
🥈 रजत22
🥉 कांस्य26
कुल62

स्थिति: 21 अक्टूबर 2026 को तीसरे दिन की प्रतियोगिताओं के बाद।

निशानेबाजी में मोना अग्रवाल का स्वर्ण, अवनी लेखरा का रजत

महिला 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग SH1 स्पर्धा में मोना अग्रवाल ने स्वर्ण पदक जीतकर भारत का खाता खोला। उन्होंने फाइनल में 250.0 अंक हासिल किए और एशियन पैरा गेम्स का नया रिकॉर्ड बनाया।

पैरालंपिक चैंपियन अवनी लेखरा ने 249.6 अंक के साथ रजत पदक हासिल किया। दोनों भारतीय खिलाड़ियों के बीच केवल 0.4 अंक का अंतर रहा।

मोना ने क्वालिफिकेशन में भी 629.1 अंक के साथ नया खेल रिकॉर्ड बनाया। दोनों खिलाड़ियों की सफलता भारतीय पैरा निशानेबाजी में उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा को दर्शाती है।

निशाद कुमार के दो स्वर्ण

भारतीय पैरा एथलीट निशाद कुमार ने पुरुषों की लंबी कूद और ऊंची कूद T47 स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक हासिल किए।

उनका प्रदर्शन इस बात का उदाहरण है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निरंतरता और बहुमुखी खेल क्षमता कितनी महत्वपूर्ण है। निशाद की दोहरी सफलता ने भारत के पदक अभियान को मजबूती दी।

सिमरन शर्मा ने भी जीते दो स्वर्ण

भारतीय धाविका सिमरन शर्मा ने महिलाओं की 200 मीटर और 100 मीटर T12 स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीते।

100 मीटर दौड़ में उन्होंने 12.02 सेकंड का समय लेकर खेलों का नया रिकॉर्ड बनाया। उनके प्रदर्शन ने भारतीय पैरा एथलेटिक्स को एक और बड़ी उपलब्धि दिलाई।

दीप्ति जीवनजी की रिकॉर्डतोड़ दौड़

दीप्ति जीवनजी ने महिलाओं की 400 मीटर T20 स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया। उन्होंने 56.36 सेकंड का समय लेकर एशियन पैरा गेम्स का नया रिकॉर्ड बनाया।

दीप्ति की सफलता ने प्रतियोगिता के शुरुआती दिनों में भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

तीसरे दिन पांच स्वर्ण पदकों से भारत की छलांग

21 अक्टूबर को भारतीय खिलाड़ियों ने पांच स्वर्ण पदक जीते। इस दिन प्रमुख स्वर्ण पदक विजेता रहे:

  • सिमरन शर्मा: महिला 100 मीटर T12।
  • दिलीप गावित: पुरुष 100 मीटर T47।
  • सचिन सरजेराव खिलारी: पुरुष गोला फेंक F46।
  • आयुष वर्मा: पुरुष गोला फेंक F53।
  • प्रवीण कुमार: पुरुष ऊंची कूद।

भारत ने तीसरे दिन कुल 27 पदक हासिल किए। इस प्रदर्शन से देश की कुल पदक संख्या 62 पहुंच गई और भारत पदक तालिका में पांचवें स्थान पर आ गया।

तीरंदाजी, तैराकी और पावरलिफ्टिंग में भी सफलता

भारतीय खिलाड़ियों ने एथलेटिक्स के अलावा दूसरे खेलों में भी पदक हासिल किए।

महिला कंपाउंड तीरंदाजी युगल स्पर्धा में शीतल देवी और पायल नाग ने रजत पदक जीता। तैराक रवि कार्तिक बुडिगिना ने 100 मीटर फ्रीस्टाइल और 100 मीटर बैकस्ट्रोक S13 स्पर्धाओं में रजत पदक हासिल किए।

पावरलिफ्टिंग में अशोक ने पुरुषों की 65 किलोग्राम श्रेणी में रजत पदक जीता, जबकि कस्तूरी राजामणि ने महिलाओं की 67 किलोग्राम श्रेणी में रजत पदक अपने नाम किया।

पैरा टेबल टेनिस में भी भारतीय खिलाड़ियों ने कई कांस्य पदक हासिल किए। इनमें जेहान मदन, सोनलबेन पटेल, भावना पटेल, प्राची पांडे और बेबी सहाना रवि शामिल हैं।

पदकों से आगे है इन खिलाड़ियों की उपलब्धि

एशियन पैरा गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन केवल पदक तालिका में सुधार तक सीमित नहीं है। यह खेलों में दिव्यांग खिलाड़ियों की प्रतिभा, मेहनत और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का प्रमाण है।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय सफलता को व्यापक सामाजिक बदलाव में बदलने के लिए जरूरी है कि दिव्यांग बच्चों और युवाओं को शुरुआती स्तर से ही खेल प्रशिक्षण, सुलभ मैदान, प्रशिक्षित प्रशिक्षक, सहायक उपकरण और आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए।

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के दिव्यांग खिलाड़ियों तक खेल सुविधाएं पहुंचाना विशेष महत्व रखता है। जिला स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें राज्य तथा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करना आवश्यक है।

भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियां गर्व का विषय हैं। उनकी सफलता का वास्तविक सम्मान तब होगा, जब प्रत्येक प्रतिभाशाली दिव्यांग खिलाड़ी को अपनी क्षमता दिखाने के लिए समान अवसर और जरूरी संसाधन मिलेंगे।

दिव्यांगवाणी | www.udaen.info



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By udaen

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