सूचनाओं की सत्यता, सांप्रदायिक सौहार्द और पीड़ितों की पहचान की सुरक्षा पर जोर; भ्रामक व सनसनीखेज प्रसारण पर सरकार सख्त
नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने निजी सैटेलाइट टेलीविजन चैनलों को प्रसारण नियमों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी है। मंत्रालय ने 21 अक्टूबर 2026 को जारी एडवाइजरी में आतंकवाद विरोधी अभियानों की लाइव कवरेज, अपराध और हिंसा से जुड़े दृश्यों, सांप्रदायिक बहसों, प्राकृतिक आपदाओं की रिपोर्टिंग तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस्तेमाल को लेकर विशेष निर्देश दिए हैं।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि टेलीविजन चैनलों को केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 और केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 के तहत निर्धारित कार्यक्रम संहिता का अक्षरशः पालन करना चाहिए। नियमों के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

एक ही खबर और दृश्यों के बार-बार प्रसारण पर भी चिंता
मंत्रालय के अनुसार, विभिन्न निजी टीवी चैनलों द्वारा कार्यक्रम संहिता का पूरी तरह पालन नहीं किए जाने के मामले सामने आए हैं। अंतर-विभागीय समिति (आईडीसी) ने भी पाया कि कई चैनलों पर समान विषयों से संबंधित मिलते-जुलते समाचार और दृश्य प्रसारित किए जा रहे हैं।
समिति ने प्रसारण सामग्री को निर्धारित नियमों और उनकी मूल भावना के अनुरूप रखने की सिफारिश की। साथ ही, अनुचित व्यवहार और आपत्तिजनक भाषा को सामान्य व्यवहार के रूप में प्रस्तुत नहीं करने पर जोर दिया गया है।
1. आतंकवाद विरोधी अभियानों की लाइव कवरेज पर प्रतिबंध
एडवाइजरी के अनुसार, सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे आतंकवाद विरोधी अभियानों की लाइव कवरेज प्रतिबंधित है।
ऐसे अभियानों के दौरान मीडिया कवरेज अधिकृत अधिकारी की समय-समय पर दी जाने वाली जानकारी तक सीमित रहनी चाहिए, जब तक अभियान समाप्त नहीं हो जाता।
जरूरत पड़ने पर प्रसारित दृश्यों पर तारीख और समय का उल्लेख भी करना होगा, ताकि दर्शकों को पुराने दृश्यों से लाइव प्रसारण का भ्रम न हो।
2. अपराध और हिंसा के दृश्यों में जिम्मेदारी जरूरी
मंत्रालय ने अपराध और हिंसा से संबंधित खबरों को सत्यापित तथ्यों पर आधारित रखने की सलाह दी है।
प्रमुख निर्देश हैं:
- अपुष्ट आरोपों और आधी-अधूरी जानकारी को तथ्य के रूप में प्रसारित न किया जाए।
- हिंसक और विचलित करने वाले दृश्यों को बार-बार दिखाने से बचा जाए।
- आवश्यकतानुसार तस्वीरों को धुंधला करने या संवेदनशील हिस्सों को छिपाने की तकनीक अपनाई जाए।
- अपराध को महिमामंडित करने अथवा गैरकानूनी व्यवहार को सामान्य दिखाने वाली सनसनीखेज प्रस्तुति से बचा जाए।
- महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों की रिपोर्टिंग में विशेष सावधानी बरती जाए।
3. प्राकृतिक आपदाओं की खबरों में तथ्यपरकता
प्राकृतिक आपदाओं, बड़े हादसों और अन्य गंभीर घटनाओं की रिपोर्टिंग करते समय सत्यापित जानकारी को प्राथमिकता देनी होगी।
मंत्रालय ने कहा है कि आवश्यकतानुसार दृश्यों पर समय और तारीख अंकित की जाए, जिससे पुराने वीडियो को वर्तमान घटना के रूप में दिखाने से बचा जा सके। इसका उद्देश्य दर्शकों में अनावश्यक भय और अफरा-तफरी की स्थिति पैदा होने से रोकना है।
4. भारत के प्रामाणिक नक्शों का इस्तेमाल अनिवार्य
एडवाइजरी में टेलीविजन प्रसारण, समाचार ग्राफिक्स और डिजिटल प्रस्तुतियों में भारत के केवल प्रामाणिक नक्शों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
इसके लिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) द्वारा प्रकाशित आधिकारिक नक्शों का उपयोग करने को कहा गया है।
5. सांप्रदायिक सौहार्द और टीवी बहसों पर जोर
मंत्रालय ने समाचार चैनलों को निर्देश दिया है कि उनके कार्यक्रम सांप्रदायिक वैमनस्य अथवा राष्ट्रविरोधी भावनाओं को बढ़ावा देने वाले नहीं होने चाहिए।
विशेष रूप से लाइव बहसों और पैनल चर्चाओं में संपादकीय नियंत्रण मजबूत रखने पर जोर दिया गया है।
इसके लिए:
- वक्ताओं और पैनल सदस्यों का सावधानीपूर्वक चयन किया जाए।
- कार्यक्रम से पहले प्रतिभागियों को प्रसारण संबंधी नियमों से अवगत कराया जाए।
- आपत्तिजनक, अपमानजनक या भड़काऊ टिप्पणियों की स्थिति में आवश्यकतानुसार आवाज बंद करने, चेतावनी देने अथवा प्रसारण रोकने जैसे कदम उठाए जाएं।
6. यौन अपराध पीड़ितों की पहचान उजागर नहीं हो
एडवाइजरी में यौन अपराधों के पीड़ितों की पहचान की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है।
चैनलों को पीड़ित की तस्वीर, परिवार का विवरण, निवास स्थान या ऐसी कोई अन्य जानकारी प्रसारित नहीं करनी चाहिए, जिससे उसकी प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष पहचान उजागर हो सकती हो।
इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और लागू कानूनी प्रावधानों का पालन करना आवश्यक है।
7. समाचारों में एआई के इस्तेमाल पर सावधानी
मंत्रालय ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), विशेषकर जनरेटिव एआई, के इस्तेमाल को लेकर भी सतर्क किया है।
एआई का उपयोग समाचार ग्राफिक्स, आभासी समाचार प्रस्तुतियों और अन्य प्रसारण सामग्री में सहायक भूमिका तक सीमित रखने की सलाह दी गई है। इसके इस्तेमाल से समाचारों की सटीकता, प्रामाणिकता और संवेदनशीलता प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
इसका आशय यह है कि तकनीक के उपयोग के दौरान समाचारों की विश्वसनीयता और तथ्यात्मक शुद्धता से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
संपादकीय और प्रशिक्षण व्यवस्था मजबूत करने की सलाह
मंत्रालय ने प्रसारकों से समाचार संकलन, संपादन, निर्माण, प्रसारण और प्रस्तुति से जुड़े कर्मचारियों को कार्यक्रम संहिता के प्रावधानों के प्रति जागरूक करने को कहा है।
इसके लिए नियमित प्रशिक्षण, कार्यशालाओं और जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन की सलाह दी गई है।
एडवाइजरी सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी से जारी की गई है। मंत्रालय ने दोहराया है कि कार्यक्रम संहिता के उल्लंघन पर केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
पत्रकारिता के लिए इस एडवाइजरी का क्या महत्व है?
यह एडवाइजरी टीवी समाचार प्रसारण में तथ्यात्मक शुद्धता, जिम्मेदार संपादन, पीड़ितों की निजता और संवेदनशील घटनाओं की रिपोर्टिंग के महत्व को रेखांकित करती है।
हालांकि, यह एडवाइजरी विशेष रूप से निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को संबोधित है। इसे सभी प्रिंट समाचार पत्रों, समाचार वेबसाइटों और स्वतंत्र डिजिटल पत्रकारों पर स्वतः लागू होने वाला आदेश नहीं माना जाना चाहिए। अन्य माध्यमों पर लागू नियमों और कानूनी दायित्वों का निर्धारण उनके संबंधित नियामक प्रावधानों के अनुसार होगा।
