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वर्ष 2031 तक की परिप्रेक्ष्य योजना की समीक्षा, वन पंचायतों में सी-बकथॉर्न लगाने और स्थानीय आजीविका बढ़ाने पर जोर

देहरादून। उत्तराखंड में वन संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों की आजीविका और रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से ग्रीन इंडिया मिशन की अगले पांच वर्षों की कार्ययोजना की समीक्षा की गई। सचिवालय में राज्य वन विकास अभिकरण (एसएफडीए) की सातवीं राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति की बैठक प्रमुख सचिव, वन एवं पर्यावरण आर.के. सुधांशु की अध्यक्षता में हुई।

बैठक में वर्ष 2031 तक के लिए तैयार परिप्रेक्ष्य योजना की समीक्षा करते हुए प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को वन आधारित आजीविका संवर्धन से जुड़ी गतिविधियों को प्राथमिकता देने और इस संबंध में विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने वन पंचायतों में भी सी-बकथॉर्न के पौधरोपण तथा आजीविका संवर्धन के विषयों पर शीघ्र बैठक आयोजित करने को कहा।

559.16 करोड़ रुपये की वित्तीय जरूरत का आकलन

बैठक में बताया गया कि ग्रीन इंडिया मिशन की वर्तमान परिप्रेक्ष्य योजना के क्रियान्वयन के लिए 559.16 करोड़ रुपये की वित्तीय आवश्यकता का आकलन किया गया है। हालांकि, यह आकलित आवश्यकता है, इसे स्वीकृत या जारी धनराशि नहीं माना जाना चाहिए।

राज्य वन विकास अभिकरण का वर्ष 2031 तक के अगले पांच वर्षों के लिए नवीनीकरण किया गया है। अभिकरण के अंतर्गत ग्रीन इंडिया मिशन, नगर वन योजना और स्कूल नर्सरी योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

बैठक में मिशन के तीन उप-मिशनों, केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों और योजना के क्रियान्वयन से संबंधित दस्तावेजों की जानकारी भी दी गई।

31.45 करोड़ की वार्षिक परिचालन योजना केंद्र को भेजी

अधिकारियों के अनुसार, ग्रीन इंडिया मिशन के नए कार्यों को छोड़कर जुलाई 2025 और मई 2026 में कुल 31.45 करोड़ रुपये की वार्षिक परिचालन योजना (एपीओ) भारत सरकार को भेजी गई है।

सरकार से धनराशि स्वीकृत होने और जारी किए जाने के बाद स्थानीय समुदायों की आजीविका के विकास के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जाने की योजना है।

वन संरक्षण के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था का सवाल

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में वन संरक्षण को स्थानीय रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ना महत्वपूर्ण है। वन पंचायतों के माध्यम से पौधरोपण, पौधशालाओं के विकास, स्थानीय उत्पादों के संवर्धन और वन आधारित आजीविका के अवसरों को बढ़ावा दिया जा सकता है।

हालांकि, योजनाओं की सफलता केवल पौधरोपण या बजट के आकलन से नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की भागीदारी, पौधों के जीवित रहने, उत्पादों के विपणन और ग्रामीण परिवारों की आय में होने वाली वास्तविक वृद्धि से तय होगी।

बैठक में प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) कपिल लाल, पीसीसीएफ (वन्यजीव) नीना ग्रेवाल, एपीसीसीएफ (प्रोजेक्ट) विवेक पांडेय, अपर प्रमुख वन संरक्षक एवं नोडल अधिकारी (वन संरक्षण) मीनाक्षी जोशी, अपर सचिव नवनीत पांडेय, विक्रम सिंह यादव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


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By udaen

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