खेती से जुड़ी 5 सरकारी योजना
प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम किसान योजना)
भारत के केन्द्रीय अंतरिम बजट में घोषित इस योजना के अंतर्गत सभी लघु एवं सीमान्त किसानों को न्यूनतम आमदनी समर्थन के रूप में हर साल ₹6,000 मिलेंगे। इस योजना का उद्देश्य किसानों को अपेक्षित कृषि आमदनी के अनुपात में फसलों की समुचित सेहत और सही पैदावार के लिए विभिन्न इनपुट्स के खर्च की पूर्ति करना है। अपनी पात्रता का पता करने के लिए निकटतम कृषि विज्ञान केंद्र में संपर्क करें।
मृदा स्वास्थय कार्ड योजना (सॉइल हेल्थ कार्ड)
यह योजना 2015 में आरम्भ की गयी थी। इसका उद्देश्य देश में सभी किसानों को मृदा स्वास्थय कार्ड जारी करने में राज्य सरकारों की सहायता करना है। इन कार्डों में किसानों को उनके खेत की मिट्टी के पोषक तत्वों की जानकारी दी जाती है और मिट्टी की गुणवत्ता तथा उर्वरकता बढ़ाने के लिए ज़रूरी पोषक तत्वों की उचित खुराक बतायी जाती है। यह लाभ पाने के लिए किसानों को अपने-अपने जिले के कृषि पदाधिकारी से संपर्क करना चाहिए।
प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई)
‘हर खेत को पानी’ के मूलमंत्र के साथ 1 जुलाई, 2015 को प्रारम्भ की गयी इस योजना का लक्ष्य सिंचाई आपूर्ति श्रृंखला, जैसे कि जलीय स्रोत, वितरण नेटवर्क और खेत स्तर पर प्रयोग में शुरू से अंत तक समाधान उपलब्ध कराना है। इसमें ‘जल संचय’ और ‘जल सिंचन’ के माध्यम से माइक्रो लेवल पर वर्षाजल का संग्रह करके सुरक्षात्मक सिंचाई का निर्माण होता है। सूखे की हालत से निकलने में मदद के लिए किसानों को इस योजना का लाभ उठाना चाहिए। अधिक जानकारी के लिए निकटतम कृषि विज्ञान केंद्र में संपर्क करें।
मौसम-आधारित फसल बीमा
मौसम-आधारित फसल बीमा का उद्देश्य प्रतिकूल मौसम, जैसे कि वर्षा, गर्मी, पाला, आर्द्रता, आदि के कारण किसानों को होने वाले नुकसान को कम करना है। बटाईदार और काश्तकार (असामी) सहित सभी किसान जो अधिसूचित क्षेत्र में अधिसूचित फसल उगाते है, इस बीमा सुरक्षा के पात्र हैं। इस योजना में दावों का तीव्रतम गति से निपटारा होता है और यह हर किसान के लिए ज़रूरी है। निकटतम कृषि विज्ञान केंद्र के कार्यालय में यह बीमा मिलता है।
प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई)
पीएमएफबीआई एक बीमा क़िस्त-आधारित योजना है जिसके अंतर्गत किसान को खरीफ के लिए प्रीमियम का अधिकतम 2%, रबी और तिलहन के लिए 1.5%, और सालाना वाणिज्यिक/बागवानी फसलों के लिए 5% अदा करना होता है। बीमांकिक/संविदात्मक प्रीमियम के बाकी हिस्से को केंद्र और राज्य सरकार द्वारा बराबर-बराबर वहन किया जाता है। दावों का त्वरित निपटारा करना इस योजना का एक प्रमुख उद्देश्य है. निकटतम कृषि विज्ञान केंद्र से विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है
