एंटीबॉयोटिक का विकल्प बनी 13 जड़ी-बूटियां


सुदर्शन वटी- इस वटी के सहारे विलर में किसी भी तरह की सूजन को घटाया जा सकता है.
संजीवनी बूटी- इस वटी के सहारे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.
गोदंती भस्म- बुखार, अल्सर आदि को ठीक करती है.
त्रिभुवन कीर्ति रस- डेंगू, चिकनगुनिया में रामबाण इलाज है.
मृत्युंजय रस- यह अपच और वात रोग में काफी असरदार है,
आठ अन्य तत्व- तुलसी, कुटकी, चिरायाता, मोथा, गिलोय, दारूहल्दी, करंज और अप्पामार्ग का अंश भी काफी अहम है.
स्टैफिलोकोकस प्रजाति का बैक्टीरिया सांस, पेट और त्वचा संबंधी संक्रमण को फैलाता है और कमजोर प्रतिरोध क्षमता वालों के लिए घातक साबित होता है. यहां पर आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ रामनिवास पारशर के मुताबिक यह शोध साबित करता है कि आयुर्वेद में एंटीबायोटिक दवाओं का विकल्प मौजूद है जो पूरी तरह से जड़ी-बूटी पर आधारित है. इसीलिए सरकार को भी इस दिशा में फोकस करना चाहिए.
