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बॉर्डर की निगरानी में मदद करेगी सौर ऊर्जा, भारतीय सेना का खर्च भी होगा कम
Written By: अंकित तिवाड़ी |

बॉर्डर की निगरानी में मदद करेगी सौर ऊर्जा, भारतीय सेना का खर्च भी होगा कम

राजस्थान के ऊर्जा विभाग ने इस आधार पर काम करना शुरू कर दिया है.

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय बॉर्डर के आसपास खाली पड़ी बंजर जमीन पर सौर ऊर्जा पार्क(Solar Energy Park) बनाने की तैयारी कर रहा है.
जयपुर: बॉर्डर पर पहरेदारी अब शस्त्रों के साथ सौर ऊर्जा(Solar Energy) से भी होगी. राजस्थान(Rajasthan) और गुजरात(Gujrat) राज्यों से सटी सीमा पर प्रमुखता से काम होगा. नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय बॉर्डर के आसपास खाली पड़ी बंजर जमीन पर सौर ऊर्जा पार्क(Solar Energy Park) बनाने की तैयारी कर रहा है. इन सौर ऊर्जा पार्कों से सीमा पर लगी लाइटों के साथ आसपास की आबादी को भी फायदा होगा.

बॉर्डर से सटे राज्यों के मंत्रियों और अधिकारियों के साथ हुई बैठक में गुजरात में इस प्लान पर मंथन हुआ था. राजस्थान के ऊर्जा विभाग ने इस आधार पर काम करना शुरू कर दिया है. बॉर्डर क्षेत्र के पास यह सौर ऊर्जा पार्क भारतीय सौर ऊर्जा निगम लिमिटेड तैयार करेगा.

बॉर्डर पर दिखेगी सोलर पॉवर
देश की पाकिस्तान से सटी सीमा में 50 हजार खम्बों पर 1,50,000 तेज रोशनी वाली लाइट्स से सुरक्षा तंत्र आतंकी गतिविधियों और घुसपैठ पर रातभर निगरानी रखते हैं. बॉर्डर एरिया में 1700 किलोमीटर का क्षेत्र ऐसा हैं जहां सौर ऊर्जा संभावनाए अधिक हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना(Indian Army) अब सीमा पर लगी फ्लैड लाइटों का करंट सौर ऊर्जा से लेने की तैयारी में हैँ. राजस्थान और गुजरात सीमा पर लगी लाइटें प्रमुखता से सौर्य ऊर्जा से जगमगाएंगी. इसके लिए ‘नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने प्लान तैयार किया है. जिसके लिए राजस्थान सरकार(Rajasthan Government) ने भी जमीन उपलब्धता और अन्य सुविधाएं देने में अपनी सहमति प्रदान की हैं. सौर ऊर्जा ग्रिड की बिजली डिस्कॉम्स लेंगे. इससे भारतीय सेना के नियमित खर्च में कमी आएगी.

राजस्थान और गुजरात में होगा काम
गुजरात और राजस्थान की सीमा से सटे क्षेत्र में रात के समय रौशनी अब सौर ऊर्जा से होगी. बॉर्डर पर रात के समय आंतकियों और घुसपैठियों की रोकथाम के लिए फ्लड लाइटों से रौशनी की जाती हैं. सेना, केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ राजस्थान और गुजरात की सरकारों के डिस्कॉम्स जल्द ही इस बारे में बैठक करेंगे. करीब तीन हजार पांच सौ करोड़ रुपए की लागत से बॉर्डर एरिया पर सौर ऊर्जा की मदद से रात के समय निगरानी का प्रावधान हैं.

गहलोत सरकार ने शुरू की कोशिश
प्रदेश के ऊर्जा मंत्री डॉ बीडी कल्ला(BD Kalla) का कहना है कि पाकिस्तान से सटी राजस्थान की सीमा को अब सौर उर्जा से रोशन करने की कवायद चल रही है. गुजरात का भी इसमें नाम हैं. सीमा के निकट खाली पड़ी जमीन पर सौर उर्जा पार्क विकसित करने की योजना बनाई जा रही है. सीमावर्ती क्षेत्रों में सोलर प्लांट विकसित किए जाएंगे, जहां से बिजली पैदा करके सीधे डेडिकेटेड फीडर्स के माध्यम से फ्लड लाइटों तक पहुंचाई जाएगी. इन इलाकों में फिलहाल जोधपुर विधुत वितरण के माध्यम से बिजली पहुंचाई जा रही है. अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हर माह करीब 40 लाख यूनिट बिजली खर्च होती है. इसका मासिक बिल 3 करोड़ से अधिक तक आता है. ग्रिड बनने से जो बिजली डिस्कॉम्स को बेची जाएगी उससे बिजली खर्च में बड़ी कमी आएगी. इसके अलावा बीएसएफ(BSF) की प्रत्येक सीमा चौकी पर 1.5 किलोवाट का ब्रेनी इको सौर इंवर्टर लगाया जाएगा, जिसमें 500 मेगावाट सोलर पैनल और बैटरी होती है. इसके माध्यम से रोशनी के साथ ही दो से तीन पंखे भी चलाए जा सकेंगे.

राजस्थान और गुजरात में बॉर्डर का बड़ा क्षेत्र बंजर भूमि के रुप में हैं. जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर और कच्छ में इन सौर ऊर्जा पार्कों को विकसित करने की पूरी संभावनाए हैं. केंद्र और राज्य सरकारों का यह प्लान सेना के खर्च को कम करने के साथ बॉर्डर एरिया में बसी आबादी को भी 24 घंटे बिजली की सुविधा मुहैया करवाने में मददगार साबित होगा.


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By udaen

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