PKVY: आर्गेनिक फार्मिंग के लिए मोदी सरकार दे रही 50 हजार रुपये, बंजर होने से बचेगी धरती!-
ग्रेटर नोएडा के एक्सपो मार्ट में चल रहे कॉप-14 (Conference of Parties) को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने एलान किया कि 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर बंजर जमीन को उपजाऊ बनाएगा. पहले ये लक्ष्य 2.1 करोड़ हेक्टेयर था. तो सरकार की इस मुहिम में आप भी अपना योगदान दीजिए. सरकार से पैसा लीजिए और आर्गेनिक खेती को बढ़ावा दीजिए.
धरती को बंजर होने से बचाने के लिए भारत में हो रहा है सम्मेलन
50 हजार रुपये हेक्टेयर मिलेगी मदद
>>परंपरागत कृषि विकास योजना PKVY (Paramparagat Krishi Vikas Yojana) से आपको प्राकृतिक खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये मिलेंगे.
>> इसमें से किसानों को जैविक खाद, जैविक कीटनाशकों और वर्मी कंपोस्ट आदि खरीदने के लिए 31,000 रुपये (61 प्रतिशत) मिलता है.
>> मिशन आर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ इस्टर्न रीजन के तहत किसानों को जैविक इनपुट खरीदने के लिए तीन साल में प्रति हेक्टेयर 7500 रुपये की मदद दी जा रही है.
>> स्वायल हेल्थ मैनेजमेंट के तहत निजी एजेंसियों को नाबार्ड के जरिए प्रति यूनिट 63 लाख रुपये लागत सीमा पर 33 फीसदी आर्थिक मदद मिल रही है.
>> ऐसी खेती में कीटनाशक और रासायनिक खादों (Pesticides and Chemical Fertilizers) का इस्तेमाल नहीं होता.
>> आखिर सरकार की इस अपील के पीछे क्या मकसद है. क्या रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल से धरती की उर्वरा शक्ति कम हो रही है या फिर लोगों के खराब होते स्वास्थ्य ने चिंता बढ़ा दी है?
आर्गेनिक फार्मिंग का बढ़ रहा है बाजार
>>इंटरनेशनल कंपीटेंस सेंटर फॉर आर्गेनिक एग्रीकल्चर (ICCOA) के मुताबिक भारत में जैविक उत्पादों का बाजार 2020 तक 1.50 बिलियन अमेरिकी डॉलर का आंकड़ा हासिल कर लेगा.
>>केंद्रीय आयात निर्यात नियंत्रण बोर्ड (एपीडा-APEDA) के मुताबिक भारत ने 2017-18 में लगभग 1.70 मिलियन मीट्रिक टन प्रमाणिक जैविक उत्पाद पैदा किया.
>>2017-18 में हमने 4.58 लाख मीट्रिक आर्गेनिक उत्पाद एक्सपोर्ट किए. इससे देश को 3453.48 करोड़ रुपये मिले.
>>भारत से जैविक उत्पादों के मुख्य आयातक अमेरिका, यूरोपीय संघ, कनाडा, स्विट्जरलैंड, आस्ट्रेलिया, इजरायल, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, न्यूजीलैंड और जापान हैं.
दुनिया भर में बढ़ रही है आर्गेनिक उत्पादों की मांग
ऐसे ले सकते हैं आर्गेनिक खेती का सर्टिफिकेट
जैविक खेती प्रमाण पत्र लेने की एक प्रक्रिया है. इसके लिए आवेदन करना होता है. फीस देनी होती है. प्रमाण पत्र लेने से पहले मिट्टी, खाद, बीज, बोआई, सिंचाई, कीटनाशक, कटाई, पैकिंग और भंडारण सहित हर कदम पर जैविक सामग्री जरूरी है. यह साबित करने के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री का रिकॉर्ड रखना होता है. इस रिकॉर्ड के प्रमाणिकता की जांच होती है. उसके बाद ही खेत व उपज को जैविक होने का सर्टिफिकेट मिलता है. इसे हासिल करने के बाद ही किसी उत्पाद को ‘जैविक उत्पाद’ की औपचारिक घोषणा के साथ बेचा जा सकता है. एपिडा ने आर्गेनिक फूड की सैंपलिंग और एनालिसिस के लिए एपिडा ने 19 एजेंसियों को मान्यता दी है.
