10.69 सेकंड में पूरी की दौड़, हमवतन मोहम्मद बासिल ने जीता रजत पदक
आइची-नागोया, जापान | 22 अक्टूबर 2026

जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय पैरा एथलीट दिलीप महादू गावित ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने 10.69 सेकंड का समय निकालकर पहला स्थान हासिल किया। इसी स्पर्धा में भारत के मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनाकथ ने 10.72 सेकंड के समय के साथ रजत पदक जीतकर देश को दोहरी सफलता दिलाई।
भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन
पुरुषों की 100 मीटर स्पर्धा में दिलीप गावित ने बेहतरीन गति और दमदार फिनिश के दम पर स्वर्ण पदक हासिल किया। उनके हमवतन मोहम्मद बासिल ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता। चीन के कांगजुन शी 10.80 सेकंड के समय के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
इस उपलब्धि के साथ भारतीय पैरा एथलीटों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी क्षमता का परिचय दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दिलीप गावित को स्वर्ण पदक जीतने पर बधाई दी और उनके प्रदर्शन को देश के लिए गौरवपूर्ण बताया।
नासिक के गांव से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक का सफर
महाराष्ट्र के नासिक के निकट एक गांव में जन्मे दिलीप महादू गावित का जीवन संघर्ष और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। बचपन में दुर्घटना के कारण उनके एक हाथ को काटना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने खेल के प्रति अपना जुनून बनाए रखा और पैरा एथलेटिक्स में अपनी पहचान बनाई।
उनकी प्रतिभा को प्रशिक्षक वैजनाथ काले ने पहचाना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन दिया। गावित ने इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। वर्ष 2022 के एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने पुरुषों की 400 मीटर स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। पेरिस पैरालंपिक 2024 में भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया।
400 मीटर से 100 मीटर तक, मेहनत ने दिलाई नई पहचान
दिलीप गावित की खेल यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू उनकी स्पर्धा में बदलाव भी है। 400 मीटर दौड़ में पहचान बनाने वाले गावित ने 100 मीटर स्पर्धा पर ध्यान केंद्रित किया और वर्ष 2026 के राष्ट्रमंडल खेलों के बाद एशियन पैरा गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीतकर अपनी क्षमता साबित की।
दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा
दिलीप गावित की सफलता बताती है कि उचित प्रशिक्षण, अवसर और निरंतर मेहनत से खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। उनकी उपलब्धि दिव्यांग खिलाड़ियों को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।
खेलों में समान अवसर, सुलभ प्रशिक्षण सुविधाएं और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि देश के अधिक खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर सकें।
संपादकीय दृष्टिकोण: दिलीप गावित की जीत केवल एक पदक की उपलब्धि नहीं, बल्कि खेलों में प्रतिभा को अवसर देने के महत्व को भी रेखांकित करती है। दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए बेहतर प्रशिक्षण, सुलभ खेल परिसर और निरंतर सरकारी सहयोग सुनिश्चित करना इस सफलता से मिलने वाला महत्वपूर्ण संदेश है।
स्रोत: दूरदर्शन इंडिया, इंडिया टुडे और प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक विज्ञप्ति।
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