Spread the love

एशियन पैरा गेम्स 2026: 65.11 मीटर का आखिरी थ्रो बना निर्णायक, भारतीय खिलाड़ी अजीत सिंह ने जीता रजत; दिवंगत माँ को समर्पित किया गोल्ड मेडल

नागोया/नई दिल्ली। जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय पैरा एथलीट रिंकू हुड्डा ने पुरुषों की भाला फेंक (जैवलिन थ्रो) एफ46 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया। रिंकू ने अपने अंतिम प्रयास में 65.11 मीटर का थ्रो किया और भारत के ही अजीत सिंह को महज नौ सेंटीमीटर के अंतर से पीछे छोड़ दिया। अजीत सिंह ने 65.02 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक जीता, जबकि इंडोनेशिया के आर. सक्त्योनो ने 55.30 मीटर के थ्रो के साथ कांस्य पदक हासिल किया।

आखिरी प्रयास में पलटा मुकाबला

प्रतियोगिता में भारतीय खिलाड़ियों के बीच स्वर्ण पदक के लिए कड़ा मुकाबला देखने को मिला। अजीत सिंह ने अपने चौथे प्रयास में 65.02 मीटर का थ्रो करके बढ़त बनाई। रिंकू हुड्डा ने अंतिम प्रयास में 65.11 मीटर भाला फेंककर मुकाबले का परिणाम बदल दिया।

रिंकू का यह प्रदर्शन उनके सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा। इस जीत के साथ भारत ने इस स्पर्धा में स्वर्ण और रजत दोनों पदक अपने नाम किए।

माँ को खोने के बाद भी नहीं छोड़ा अभ्यास

रिंकू हुड्डा की इस उपलब्धि के पीछे संघर्ष और भावनात्मक पीड़ा की कहानी भी है। उनकी माँ का 8 अगस्त 2026 को निधन हो गया था। इस व्यक्तिगत क्षति के बावजूद रिंकू ने खेल में वापसी का निर्णय लिया।

माँ के निधन के बाद 13 दिन की शोक अवधि पूरी होते ही, 19 अगस्त से उन्होंने रोहतक के राजीव गांधी स्टेडियम में अभ्यास शुरू कर दिया। हालाँकि, वापसी की राह आसान नहीं रही। अभ्यास के दौरान उनके कंधे में चोट लग गई, जिसके कारण उन्हें लगभग 20 दिन आराम करना पड़ा। चोट और मानसिक संघर्ष के बीच उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी।

हाथ में माँ की तस्वीर, तस्वीर पर लिखा था—’लव यू, माँ’

स्वर्ण पदक जीतने के बाद रिंकू हुड्डा ने अपनी माँ को भावुक श्रद्धांजलि दी। उनके हाथ में माँ की तस्वीर थी, जिस पर ‘लव यू, माँ’ लिखा था।

रिंकू ने कहा कि पिछले दो महीनों से वह भावनात्मक रूप से कठिन दौर से गुजर रहे हैं। बाहर से सब सामान्य दिखाई देता है, लेकिन भीतर की स्थिति अलग है। उन्होंने यह स्वर्ण पदक अपनी माँ को समर्पित किया।

उनकी यह भावुक अभिव्यक्ति खेल के पीछे छिपे मानवीय संघर्ष को सामने लाती है। यह जीत केवल मैदान पर हासिल की गई उपलब्धि नहीं, बल्कि व्यक्तिगत दुख के बीच अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहने की कहानी भी है।

बचपन की दुर्घटना से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक

हरियाणा के रोहतक जिले के धमड़ गाँव से संबंध रखने वाले रिंकू हुड्डा ने बचपन में कृषि मशीन से हुई दुर्घटना में अपना बायाँ हाथ खो दिया था। इसके बावजूद उन्होंने पैरा एथलेटिक्स में अपनी पहचान बनाई और भाला फेंक में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया।

एशियन पैरा गेम्स में भी उनका सफर लगातार आगे बढ़ा है। उन्होंने 2018 में कांस्य और 2022 में रजत पदक जीता था। वर्ष 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने इस प्रतियोगिता में अपने पदकों का क्रम पूरा किया। वह विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी पदक जीत चुके हैं।

प्रधानमंत्री ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 अक्टूबर 2026 को रिंकू हुड्डा को स्वर्ण पदक जीतने पर बधाई दी। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, उन्होंने 65.11 मीटर के सत्र के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन और रिंकू के अनुशासन एवं समर्पण की सराहना की तथा उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं।

उपलब्धि के साथ एक मानवीय संदेश

रिंकू हुड्डा की जीत भारत के पैरा खिलाड़ियों की प्रतिभा, अनुशासन और दृढ़ संकल्प को रेखांकित करती है। नौ सेंटीमीटर के मामूली अंतर से तय हुए इस मुकाबले में उन्होंने अंतिम प्रयास तक हार नहीं मानी।

माँ की तस्वीर के साथ स्वर्ण पदक का जश्न मनाते रिंकू की तस्वीर इस उपलब्धि को एक भावनात्मक पहचान देती है। उनका प्रदर्शन बताता है कि खेल की दुनिया में पदक के पीछे केवल शारीरिक क्षमता और तकनीक ही नहीं, बल्कि जीवन के कठिन अनुभवों से जूझते हुए आगे बढ़ने का संकल्प भी होता है।

स्रोत: प्रधानमंत्री कार्यालय, पीआईबी तथा एशियन पैरा गेम्स 2026 से संबंधित मीडिया रिपोर्टें।


Spread the love

By udaen

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *