Spread the love

कोटद्वार को केवल पहाड़ से मैदान की ओर जाने का रास्ता नहीं, बल्कि पहाड़ के भविष्य का प्रवेश-द्वार बनना होगा।

कोटद्वार की सुबह में पहाड़ से उतरती बसें दिखाई देती हैं और शाम को वही शहर पहाड़ की ओर लौटते लोगों से भर जाता है। किसी के हाथ में नौकरी का नियुक्ति-पत्र है, किसी के पास शहर में किराये का पता, किसी के साथ पढ़ाई का सपना है और किसी के मन में अपने गांव लौटने की इच्छा।

इन यात्राओं के बीच एक बड़ा सवाल छिपा है—

क्या पहाड़ छोड़ना हमारी पसंद है या हमारी मजबूरी?

यहीं से शुरू होता है—Choose Yourself.

इसका अर्थ केवल व्यक्तिगत सफलता चुनना नहीं है। इसका अर्थ है ऐसा समाज और ऐसी अर्थव्यवस्था बनाना जिसमें व्यक्ति के पास वास्तविक विकल्प हों।

कोटद्वार की भूमिका बदलनी होगी

कोटद्वार को अगर केवल बाजार, परिवहन केंद्र या पहाड़ का प्रवेश-द्वार माना जाएगा तो इसकी संभावनाएं सीमित रह जाएंगी।

यह शहर पहाड़ के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल, कृषि-आधारित उद्योग, पर्यटन, डिजिटल सेवाओं और उद्यमिता का क्षेत्रीय केंद्र बन सकता है।

पौड़ी गढ़वाल और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों के युवाओं के लिए यहां ऐसे संस्थान और बाजार विकसित होने चाहिए जहां उन्हें रोजगार की तलाश में सीधे देहरादून, हरिद्वार, दिल्ली या दूसरे महानगरों की ओर जाने की मजबूरी कम हो।

कोटद्वार में पढ़ने वाला युवा केवल डिग्री लेकर बाहर जाने की तैयारी न करे; उसे यह अवसर भी मिले कि वह यहीं अपना उद्यम शुरू कर सके।

पहाड़ में संसाधन हैं, कमी अवसरों की है

पहाड़ खाली नहीं हैं। वहां जंगल हैं, पानी है, जमीन है, जैव विविधता है, पारंपरिक ज्ञान है, स्थानीय खाद्य पदार्थ हैं, औषधीय वनस्पतियां हैं, हस्तशिल्प है और पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं।

समस्या यह है कि इन संसाधनों को स्थानीय युवाओं की आय से जोड़ने वाली पूरी श्रृंखला अभी पर्याप्त मजबूत नहीं है।

यदि गांव में पैदा होने वाला मंडुवा, झंगोरा, चौलाई, दालें, फल, मसाले या अन्य स्थानीय उत्पाद कच्चे माल के रूप में बाहर चले जाएं और मूल्यवर्धित उत्पाद बनाकर वापस महंगे दामों पर पहाड़ में आएं, तो रोजगार और आय का बड़ा हिस्सा बाहर चला जाता है।

स्थानीय संसाधन + स्थानीय प्रसंस्करण + स्थानीय ब्रांड + स्थानीय बाजार = स्थानीय रोजगार।

यही पहाड़ की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण रास्ता हो सकता है।

पलायन पर केवल चिंता नहीं, विकल्प चाहिए

पलायन पर वर्षों से चर्चा होती रही है। आयोग बने, योजनाएं बनीं, आंकड़े जुटाए गए और गांवों की स्थिति पर रिपोर्टें आईं।

लेकिन किसी युवा से केवल यह कहना कि “गांव मत छोड़ो”, समाधान नहीं है।

उससे यह पूछना होगा—

गांव में तुम्हें मिलेगा क्या?

रोजगार?
उद्यम के लिए पूंजी?
इंटरनेट?
अच्छी शिक्षा?
स्वास्थ्य सुविधा?
बाजार?
परिवहन?
प्रशिक्षण?
स्थानीय प्रसंस्करण की सुविधा?

यदि इन सवालों के जवाब नहीं हैं तो पलायन को केवल भावनात्मक मुद्दा बनाकर नहीं रोका जा सकता।

युवाओं को केवल नौकरी नहीं, निर्णय चाहिए

आज का युवा केवल नौकरी खोजने वाला व्यक्ति नहीं है। वह उद्यमी हो सकता है, किसान-उद्यमी हो सकता है, पत्रकार हो सकता है, तकनीकी विशेषज्ञ हो सकता है, पर्यटन व्यवसायी हो सकता है या अपने गांव में सामाजिक परिवर्तन का नेतृत्व कर सकता है।

लेकिन इसके लिए उसे निर्णय लेने की जगह चाहिए।

स्थानीय निकायों, ग्राम संस्थाओं, व्यापार संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और विकास योजनाओं में युवाओं की वास्तविक भागीदारी जरूरी है।

रिटायर्ड लोगों का अनुभव महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी शहर या क्षेत्र का भविष्य केवल अतीत के अनुभव से नहीं चल सकता। भविष्य की जिम्मेदारी उस पीढ़ी को भी देनी होगी जो उस भविष्य में जीने वाली है।

कोटद्वार का विकास पहाड़ से अलग नहीं

कोटद्वार में सड़क, यातायात, जल निकासी, बाजार, आवास, कचरा प्रबंधन और सार्वजनिक सेवाओं की समस्याएं हैं तो इनके समाधान को केवल नगर की सीमा तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता।

क्योंकि कोटद्वार का सामाजिक और आर्थिक जीवन आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों से गहराई से जुड़ा है।

पहाड़ से आने वाले लोग यहां पढ़ते हैं, इलाज कराते हैं, खरीदारी करते हैं, व्यवसाय करते हैं और रोजगार तलाशते हैं।

इसलिए कोटद्वार का विकास वास्तव में एक बड़े पर्वतीय क्षेत्र के विकास से जुड़ा प्रश्न है।

Choose Yourself का असली अर्थ

खुद को चुनने का अर्थ यह नहीं कि हर युवा पहाड़ में ही रहे।

अगर कोई युवा दिल्ली जाना चाहता है—जाए।
देहरादून में करियर बनाना चाहता है—बनाए।
विदेश जाना चाहता है—जाए।
अपने गांव में रहकर काम करना चाहता है—उसे भी समान अवसर मिले।

चुनाव व्यक्ति का होना चाहिए, मजबूरी की उपज नहीं।

यही अंतर है।

हमें ऐसा पहाड़ चाहिए जहां गांव छोड़ना अपराधबोध न हो और गांव में रहना मजबूरी न हो।

हमें ऐसा कोटद्वार चाहिए जहां पहाड़ से उतरने वाला युवा केवल बाहर जाने की तैयारी न करे, बल्कि यहां अपना भविष्य बनाने की संभावना भी देखे।

और हमें ऐसी विकास-व्यवस्था चाहिए जिसमें स्थानीय युवा केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि योजना बनाने और उसे लागू करने वाला सहभागी बने।

आज सवाल यह नहीं कि युवा पहाड़ में रहेगा या पहाड़ छोड़ेगा।

सवाल यह है—

क्या हमने उसे सचमुच चुनाव दिया है?

अगर चुनाव दिया है, तो वह अपना रास्ता खुद चुनेगा।

और अगर चुनाव नहीं दिया, तो हमारी विकास-व्यवस्था को सबसे पहले यही सवाल अपने सामने रखना होगा—

Choose Yourself.

खुद को चुनिए।
अपना गांव चुनिए या अपना शहर—लेकिन चुनाव आपका हो।
अपना रोजगार चुनिए—लेकिन अवसर वास्तविक हों।
अपना भविष्य चुनिए—लेकिन रास्ते खुले हों।

कोटद्वार को ऐसा सेतु बनाइए जो पहाड़ से लोगों को केवल बाहर न ले जाए, बल्कि अवसरों को पहाड़ तक वापस भी लेकर आए।


Spread the love

By udaen

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *