महाराष्ट्र की तर्ज पर पूरे देश में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की उठी मांग

देहरादून। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में पत्रकारिता की भूमिका, उसकी स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर देशव्यापी चर्चा तेज हो गई है। इसी क्रम में वॉइस ऑफ मीडिया उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष बेणीराम उनियाल ने केंद्र सरकार से महाराष्ट्र की तर्ज पर पूरे देश में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि पत्रकारों की सुरक्षा केवल पत्रकार समुदाय का विषय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल है।
बेणीराम उनियाल ने कहा कि पत्रकारिता सत्ता और समाज के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का काम करती है। जनहित के मुद्दों को सामने लाना, सत्ता के निर्णयों पर सवाल करना, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को उजागर करना तथा आमजन की आवाज को जिम्मेदार मंच तक पहुंचाना पत्रकारिता की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। ऐसे में यदि पत्रकार ही भय, धमकी या दबाव के माहौल में काम करने को मजबूर हों, तो इसका सीधा असर स्वतंत्र पत्रकारिता पर पड़ सकता है।
आजादी के आंदोलन में कलम की भूमिका को किया याद
उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भी पत्रकारों और लेखकों ने अपनी कलम के माध्यम से जनचेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समाचार पत्रों और लेखों के जरिए तत्कालीन परिस्थितियों को जनता तक पहुंचाया गया और स्वतंत्रता की भावना को मजबूत करने में कलमकारों ने योगदान दिया।
उनियाल ने कहा कि आजादी के दशकों बाद भी पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठना चिंता का विषय है। पत्रकारों पर हिंसा, धमकी, दबाव या उनके कार्य में बाधा डालने जैसी घटनाओं के मामलों में प्रभावी सुरक्षा और त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था जरूरी है।
महाराष्ट्र का कानून बना उदाहरण
उन्होंने महाराष्ट्र में लागू पत्रकार सुरक्षा संबंधी कानून का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने मीडिया कर्मियों और मीडिया संस्थानों के विरुद्ध हिंसक कृत्यों तथा संपत्ति को नुकसान से संबंधित मामलों के लिए विशेष कानूनी प्रावधान किए हैं। महाराष्ट्र का Media Persons and Media Institutions (Prevention of Violence and Damage or Loss to Property) Act पत्रकारों और मीडिया संस्थानों की सुरक्षा से संबंधित प्रावधान करता है।
उनियाल ने मांग की कि इसी तरह की प्रभावी व्यवस्था को देश के अन्य राज्यों में भी लागू करने की दिशा में केंद्र सरकार पहल करे, ताकि पत्रकारों को अपने दायित्वों का निर्वहन करते समय सुरक्षा का भरोसा मिल सके।
गैर-मान्यताप्राप्त पत्रकारों को भी संगठित होने का आह्वान
वॉइस ऑफ मीडिया के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पत्रकारों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर मान्यता प्राप्त ही नहीं, बल्कि गैर-मान्यताप्राप्त पत्रकारों को भी संगठित होकर अपनी आवाज उठानी होगी। उन्होंने कहा कि बदलते मीडिया परिदृश्य में डिजिटल मीडिया और विभिन्न स्वतंत्र मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़े पत्रकार भी जनहित की खबरें सामने ला रहे हैं। ऐसे में पत्रकार सुरक्षा के व्यापक ढांचे पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
हिंसा और धमकी के मामलों में त्वरित कार्रवाई की मांग
बेणीराम उनियाल ने सरकार से मांग की कि पत्रकारों के खिलाफ हिंसा, धमकी, दबाव अथवा कार्य में हस्तक्षेप की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और दोषियों के खिलाफ कानून के तहत प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही उन्होंने पत्रकारों के लिए बीमा, स्वास्थ्य सुरक्षा और वित्तीय सहायता से जुड़ी योजनाओं को मजबूत करने की आवश्यकता भी बताई।
उन्होंने कहा कि पत्रकार सुरक्षा कानून को केवल सुरक्षा का कानूनी प्रावधान न मानकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े विषय के रूप में देखा जाना चाहिए।
“सुरक्षित पत्रकार ही निर्भीक होकर जनता की आवाज उठा सकता है”
बेणीराम उनियाल ने कहा कि वॉइस ऑफ मीडिया पत्रकारों को संगठित करने और उनके हितों से जुड़े मुद्दों को उचित मंच तक पहुंचाने की दिशा में प्रयासरत है। उनका कहना है कि पत्रकार जब सुरक्षा और सम्मान के भरोसे के साथ काम करेगा, तभी वह बिना भय के जनहित के मुद्दों को सामने रख सकेगा।
उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकारों से पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ठोस नीति और प्रभावी कानूनी व्यवस्था विकसित करने की मांग करते हुए कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्र पत्रकारिता के साथ-साथ पत्रकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करना आवश्यक है।
