लखनऊ। प्रतापगढ़ जनपद के रामपुर खास की विधायक एवं उत्तर प्रदेश विधान मंडल में कांग्रेस विधान मंडल दल की नेता आराधना मिश्रा “मोना” आज मानसून सत्र में पत्रकारों के पेंशन दिए जाने के मुद्दे को सदन में उठाएंगीं।
माननीय अध्यक्ष महोदय,
मैं आपका ध्यान समाज के अग्रिणी माने जाने वाले पत्रकारों की ओर आकृष्ट कराना चाहती हूं। यह एक ऐसा वर्ग है कि जो एक दीपक की भांति पूरे समाज को तो रोशनी देता है किन्तु सच्चाई यह है कि उस दीपक की बाती की भांति अपने को नष्ट कर देता है।आज उस वर्ग के वयोवृद्ध पत्रकारों की आर्थिक स्थिति बहुत चिंताजनक है। उनकी आज न तो सरकार को परवाह है और न ही समाज को ही।वह आज किसी प्रकार विपन्नता की स्थिति अपना गुजर कर रहे हैं।इस संदर्भ में मैं बताना चाहूंगी कि मौजूदा सरकार ने वयोवृद्ध पत्रकारों को पेंशन दिए जाने को लेकर उनसे दो बार कागजातों को जमा करवाया किंतु पता नहीं सरकार को किस शुभ मुहूर्त का इंतजार है कि उसको मूर्तरूप देना मुनासिब नहीं समझा है।समाज के निरीह प्राणी बने बुजुर्ग पत्रकार सरकार की ओर टकटकी लगाए स्वाति नक्षत्र के बूंद को पाने की लालसा में लटके पड़े हैं।वह अपनी इस वेदना को किसी से कह भी नहीं पा रहे हैं और न ही सरकार उनपर ध्यान दे रही है।
जबकि मैं बताना चाहूंगी कि उत्तर प्रदेश के अलावा देश के कयी राज्यों ने पत्रकारों को पेंशन देना शुरू कर दिया है। इसमें बिहार ने 15 हजार, हरियाणा ने 10हजार, तमिलनाडु ने 15हजार,गोवा ने7500, असम ने 8हजार, त्रिपुरा ने 10हजार, उत्तराखंड ने 8हजार तथा पुडुचेरी ने 6 हजार रुपए मासिक पेंशन के रूप में दिए जा रहे हैं।
इस बारे में उ०प्र० सरकार की ओर से 26अगस्त 2022 को सभी सूचना अधिकारियों को पत्र भी जारी किए गए थे किन्तु अभी तक परिणाम शून्य ही देखने को मिला है।
मेरी सरकार से आग्रह है कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे को संज्ञान लेते हुए तत्काल पेंशन को लागू करे।
