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आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी

आयोग ने मुजफ्फरनगर जिला मजिस्ट्रेट को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की मानक संचालन प्रक्रिया और बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के अनुसार मामले की जांच करने का निर्देश दिया

आयोग ने 8 दिसंबर, 2021 की अपनी सलाह 2.0 के अनुसार श्रमिकों को ई-श्रम पोर्टल पर तत्काल पंजीकृत करने का भी निर्देश दिया

PIB Delhi

भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के मंडी गांव में स्थित एक पेपर प्लेट निर्माण कारखाने में डेढ़ साल तक बंधुआ मजदूरों को बिना पर्याप्त भोजन और मजदूरी के आधी रात तक जबरन काम कराने और उन पर अत्याचार किए जाने की मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, एक मजदूर कारखाने से भागने में सफल रहा और उसने तितावी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद अन्य मजदूरों को बचाया जा सका। उनकी चिकित्सा जांच में कई चोटें पाई गईं, जिनमें खरोंच, घाव, हड्डियां टूटना और लंबे समय तक शारीरिक शोषण के लक्षण शामिल हैं। खबरों के अनुसार, पुलिस को पता चला है कि एक व्यक्ति की मौत भी हो गई है। और भी मौतों की आशंका की जांच जारी है।

आयोग ने पाया है कि समाचार रिपोर्ट में उल्लिखित तथ्य, यदि सत्य हैं, तो ये मानवाधिकारों के उल्लंघन के गंभीर मुद्दे हैं। अतः आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने मुजफ्फरनगर के जिला मजिस्ट्रेट को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की मानक संचालन प्रक्रिया और बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के आलोक में मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। आयोग ने 8 दिसंबर, 2021 को जारी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के परामर्श 2.0 के अनुसार श्रमिकों के ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण हेतु तत्काल कार्रवाई का भी निर्देश दिया है।

25 जून, 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा, छत्तीसगढ़, झारखंड सहित विभिन्न राज्यों के थे और उनमें से कुछ नेपाल से भी थे। बताया जाता है कि उन्हें रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों और अन्य सार्वजनिक स्थानों से रोजगार, नियमित वेतन, भोजन और आवास प्रदान करने के बहाने बहला-फुसलाकर कारखाने में लाया गया था। कारखाने पहुंचने पर उनके मोबाइल फोन और पहचान पत्र कथित तौर पर जब्त कर लिए गए, जिससे वे अपने परिवारों से संपर्क नहीं कर पाए। आरोप है कि मजदूरों को डराने और उन्हें भागने से रोकने के लिए पिट बुल कुत्तों का इस्तेमाल किया गया था।


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By udaen

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