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उत्तराखंड में योग और वेलनेस सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए नई नीति, सरकार देगी सब्सिडी और प्रशिक्षकों की सहायता

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य को योग एवं वेलनेस हब के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नई योग एवं वेलनेस नीति के तहत निजी निवेश को आकर्षित करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और स्वास्थ्य पर्यटन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार सब्सिडी, प्रशिक्षकों की उपलब्धता तथा संस्थागत सहयोग प्रदान करेगी।

सरकार जुलाई माह में एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च करने जा रही है, जिसके माध्यम से निवेशक, होटल, होम-स्टे संचालक तथा अन्य इच्छुक संस्थान योजना का लाभ उठा सकेंगे। साथ ही, योग एवं आयुर्वेद से संबंधित गतिविधियों के बेहतर संचालन के लिए अलग आयुर्वेद निदेशालय के गठन की भी तैयारी की जा रही है।

योजना की प्रमुख बातें

  • पर्वतीय क्षेत्रों में नए योग एवं वेलनेस केंद्र स्थापित करने पर परियोजना लागत का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 20 लाख रुपये तक अनुदान मिलेगा।
  • मैदानी क्षेत्रों में परियोजना लागत का 25 प्रतिशत अथवा अधिकतम 10 लाख रुपये तक अनुदान दिया जाएगा।
  • योग, ध्यान और प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े अनुसंधान कार्यों के लिए विश्वविद्यालयों, स्वास्थ्य संस्थानों तथा गैर-सरकारी संगठनों को प्रति परियोजना 10 लाख रुपये तक सहायता दी जाएगी।
  • होटल, रिसॉर्ट, होम-स्टे, स्कूल और कॉलेजों में नियुक्त योग प्रशिक्षकों के लिए सरकार प्रति सत्र 250 रुपये तक की प्रतिपूर्ति करेगी।

रोजगार और स्वास्थ्य पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

सरकार का उद्देश्य केवल योग केंद्र स्थापित करना नहीं है, बल्कि राज्य में स्वास्थ्य पर्यटन (Wellness Tourism) को एक नई पहचान देना भी है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए योग प्रशिक्षक, थेरेपिस्ट, प्राकृतिक चिकित्सक, वेलनेस मैनेजर और पर्यटन क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर विकसित होने की उम्मीद है। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में यह नीति स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक हो सकती है।

योग और वेलनेस के लाभ

नियमित योगाभ्यास से—

  • शरीर का लचीलापन, संतुलन और शक्ति बढ़ती है।
  • पीठ, गर्दन और जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है।
  • तनाव, चिंता और अवसाद कम करने में सहायता मिलती है।
  • मानसिक एकाग्रता और कार्यक्षमता बढ़ती है।
  • बेहतर नींद और सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है।
  • स्वस्थ जीवनशैली और वजन नियंत्रण में मदद मिलती है।

नीति का व्यापक महत्व

उत्तराखंड पहले से ही ऋषिकेश, हरिद्वार और हिमालयी क्षेत्रों के कारण विश्व स्तर पर योग और आध्यात्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यदि इस नीति का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो राज्य योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और वेलनेस पर्यटन के क्षेत्र में राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान को और मजबूत कर सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अनुदान वितरण, प्रशिक्षकों की गुणवत्ता, पारदर्शी पोर्टल व्यवस्था और ग्रामीण क्षेत्रों तक योजनाओं की पहुंच कितनी प्रभावी रहती है। यदि इन पहलुओं पर गंभीरता से कार्य किया गया, तो यह नीति उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और जनस्वास्थ्य—तीनों के लिए दीर्घकालिक लाभकारी साबित हो सकती है।


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By udaen

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