स्पेसएक्स के IPO से पहले बदले नैस्डैक के नियम, क्या इलॉन मस्क के लिए बिछाया गया ‘रेड कार्पेट’?
न्यूयॉर्क: अमेरिकी शेयर बाजार में एक बड़ा बदलाव चर्चा का विषय बना हुआ है। Nasdaq ने अपने प्रमुख Nasdaq-100 इंडेक्स के नियमों में संशोधन किया है, जिससे अब बहुत बड़ी नई सूचीबद्ध (IPO) कंपनियां लिस्टिंग के केवल 15 ट्रेडिंग दिनों के भीतर इंडेक्स में शामिल हो सकती हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव SpaceX के बहुप्रतीक्षित IPO को ध्यान में रखकर किया गया है।
स्पेसएक्स का संभावित बाजार मूल्य लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है, जिससे यह इतिहास के सबसे बड़े IPO में शामिल हो सकता है। नए नियमों के तहत इतनी बड़ी कंपनी को पहले की तुलना में कहीं तेजी से नैस्डैक-100 में शामिल किया जा सकेगा।
आम निवेशकों पर क्या होगा असर?
स्पेसएक्स के इंडेक्स में शामिल होते ही उसे ट्रैक करने वाले हजारों अरब डॉलर के ETF, म्यूचुअल फंड, पेंशन फंड और 401(k) रिटायरमेंट फंड को अपने पोर्टफोलियो में स्पेसएक्स के शेयर खरीदने होंगे। इसका कारण यह है कि इंडेक्स फंड अपने बेंचमार्क की हूबहू नकल करते हैं। ऐसे में करोड़ों निवेशकों का पैसा अप्रत्यक्ष रूप से स्पेसएक्स में निवेशित हो जाएगा, भले ही उन्होंने स्वयं कंपनी के शेयर खरीदने का निर्णय न लिया हो।
फ्री-फ्लोट नियम भी हुए आसान
नैस्डैक ने कम फ्री-फ्लोट वाली बड़ी कंपनियों के लिए भी नियमों को अधिक लचीला बनाया है। इससे प्रमोटर-नियंत्रित कंपनियां, जिनके बाजार में कम शेयर उपलब्ध होते हैं, उन्हें भी इंडेक्स में शामिल होने का रास्ता आसान मिल सकता है। आलोचकों का कहना है कि इससे कीमतों पर कृत्रिम मांग का दबाव बन सकता है।
क्यों उठ रहे हैं सवाल?
विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि डॉट-कॉम बबल के बाद बनाए गए सख्त नियमों का उद्देश्य नए IPO से छोटे निवेशकों की सुरक्षा करना था। उनका आरोप है कि अब बड़े टेक IPO को आकर्षित करने के लिए उन सुरक्षा प्रावधानों को कमजोर किया जा रहा है। वहीं नैस्डैक का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य बड़े और प्रतिनिधिक बाजार सूचकांक को अधिक प्रभावी बनाना है।
आगे क्या?
स्पेसएक्स के IPO को केवल एक कंपनी की लिस्टिंग नहीं, बल्कि वैश्विक पूंजी बाजार के नए दौर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में अन्य विशाल निजी टेक कंपनियां भी IPO के तुरंत बाद प्रमुख इंडेक्स का हिस्सा बन सकती हैं, जिससे आम निवेशकों की बचत स्वतः ही इन कंपनियों तक पहुंचने लगेगी।
